नाले किनारे अवैध झुग्गियों पर चला बुलडोजर, 15 दिन की चेतावनी के बाद हटाया गया अतिक्रमण

गाजियाबाद। बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र और लोहा मंडी के बीच स्थित नाले के किनारे वर्षों से बनी अवैध झुग्गियों पर सोमवार को यूपी स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीसीडा) ने बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। प्रशासन का कहना है कि मानसून के दौरान नाले में जलस्तर बढऩे से बड़ा हादसा होने की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। कार्रवाई से पहले झुग्गीवासियों को 15 दिन पूर्व नोटिस देकर स्थान खाली करने की चेतावनी दी गई थी, जबकि रविवार को अंतिम बार मुनादी और मौखिक सूचना देकर झुग्गियां हटाने के लिए कहा गया था। इसके बावजूद अधिकांश लोगों ने स्थान खाली नहीं किया, जिसके बाद सोमवार को प्रशासन ने कार्रवाई अमल में लाई।
यूपीसीडा के अधिकारियों के अनुसार लोहा मंडी के समीप नाले के दोनों ओर पिछले कई वर्षों से 30 से अधिक झुग्गियां अवैध रूप से बनी हुई थीं। इन झुग्गियों में कई परिवार निवास कर रहे थे। बरसात के मौसम में नाले का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है और तेज बहाव के कारण जान-माल के नुकसान की आशंका बनी रहती है। इसी संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने मानसून से पहले नाले के किनारे से अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया। सोमवार सुबह प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में भारी पुलिस बल और जेसीबी मशीनों के साथ अभियान शुरू किया गया। सुरक्षा व्यवस्था के बीच एक-एक कर नाले के किनारे बनी झुग्गियों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। कुछ लोगों ने अपना सामान सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया, जबकि कई परिवारों को जल्दबाजी में अपना घरेलू सामान समेटना पड़ा।
यूपीसीडा के अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य किसी को बेघर करना नहीं, बल्कि संभावित दुर्घटनाओं को रोकना और नाले के किनारे बने अवैध कब्जों को हटाना है। अधिकारियों के अनुसार यदि लगातार बारिश के दौरान नाला उफनाता है तो उसके किनारे रहने वाले लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में जनहित और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह अभियान चलाया गया। दूसरी ओर कार्रवाई से प्रभावित झुग्गीवासियों ने प्रशासन के कदम पर अपनी पीड़ा व्यक्त की। उनका कहना है कि वे कई वर्षों से इसी स्थान पर रहकर मजदूरी और छोटे-मोटे काम करके अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। अब झुग्गियां हटाए जाने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी समस्या रहने के लिए सुरक्षित ठिकाना तलाशने की है। कई परिवारों ने कहा कि उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं और अचानक आशियाना उजड़ जाने से वे खुले आसमान के नीचे आने को मजबूर हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में नाले के किनारे रहना निश्चित रूप से जोखिम भरा था, लेकिन प्रशासन को कार्रवाई के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में भी ठोस कदम उठाने चाहिए थे। फिलहाल प्रशासन ने नाले के किनारे से अतिक्रमण हटाकर क्षेत्र को खाली करा दिया है, ताकि बारिश के दौरान किसी प्रकार की जनहानि की आशंका न रहे। वहीं प्रभावित परिवार अब अपने सिर पर छत की तलाश में इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।



