धान की सीधी बिजाई को खाद की दरकार

-पूसा संस्थान दिल्ली व कृषि विभाग चुनिंदा किसानों को देगा बीज
-अडींग सोसायटी का 52 हजार एकड़ का रकबा, एक बोरा खाद नहीं
मथुरा। गोवर्धन क्षेत्र के गांव अड़ींग में धान की सीधी बिजाई की तरफ किसान बेहद आकर्षित हैं। डीएसआर के नाम से विख्यात इस तकनीक में पानी की बेहद बचत के साथ रोपाई पर होने वाले खर्च में भी 70 फीसदी तक कमी आती है लेकिन यहां किसान बिजाई के लिए खाद के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं। गांव में पांच मशीनें आ चुकी हैं। गत वर्ष एक सोच फाउंडेशन के सहयोग से पूसा संस्थान ने किसानों में 1985 किस्म का 10 कुंटल धान बीज निशुल्क बांटा। इस बार मथुरा कृषि विभाग किसानों का हौसला बढ़ाने को कुछ बीज प्रदान कर रहा है।
बढ़ते लेबर चार्ज से धान किसान परेशान हो चुके हैं। पानी की कमी दूसरा कारण है।
गत वर्ष फाउण्डेशन के माध्यम से पूसा संस्थान दिल्ली से किसानों को धान का बीज तो निःशुल्क मिल गया लेकिन सीधी बिजाई की डीएसआर मशीन नहीं मिली। जून के अंतिम सप्ताह में मशीन मिली और बेहद कम किसान परफेक्ट तरीके से बुबाई कर सके लेकिन जब फसल लहलहाने लगी तो कयी किसानों ने मन बना लिया कि वह अब इसी तरीके से धान की खेती करेंगे।
कृषि सलाहकार दिलीप कुमार यादव ने बताया कि वह कयी साल से किसानों को इस दिशा में मोड़ने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन अब परफेक्ट मशीनें आने से किसान उत्साहित हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र प्रभारी वाई के शर्मा ने कहा कि अभी तापमान बहुत ज्यादा है। किसान जल्दबाजी न करें। जून के पहले हफ्ते में तापमान में गिरावट के बाद ही बुबाई करें। किसान खाद के लिए परेशान हैं। जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार ने बताया कि वह उच्चाधिकारियों से वार्ता कर प्रयास करेंगे कि अड़ींग के किसानों को सीधी बिजाई के लिए पर्याप्त खाद मिल सके।

