जिंदगी संवारने गाजियाबाद आया था परिवार, खेत में बिछी करंट की मौत ने उजाड़ दिया संसार, बेटी झुलसी

गाजियाबाद। बदायूं का गांव छोड़कर गाजियाबाद आए थान सिंह ने सोचा था कि मेहनत-मजदूरी और सब्जियों की खेती से परिवार की जिंदगी संवर जाएगी। बच्चों की गृहस्थी बसेगी और वर्षों का संघर्ष धीरे-धीरे खुशियों में बदल जाएगा। लेकिन मंगलवार सुबह जिस खेत में परिवार का पेट पालने के लिए सब्जियां उगाई जा रही थीं, वही खेत मातम का ठिकाना बन गया। राजनगर एक्सटेंशन के भोवापुर गांव में बिजली की टूटी 11 हजार वोल्ट की लाइन की चपेट में आने से थान सिंह की पत्नी सत्यवती और बहू रूबी की मौत हो गई, जबकि उन्हें बचाने पहुंची बेटी देवश्री झुलस गई। एक हादसे ने परिवार की खुशियां छीन लीं। अब थान सिंह की आंखों में अपनों को खोने का दर्द और आवाज में जिम्मेदारों को सजा दिलाने की कसक है। बदायूं जिले के कादरचौक थाना क्षेत्र के खिरिया बारखपुर गांव निवासी थान सिंह का परिवार पीढिय़ों से सब्जियों की खेती करता रहा है। गांव में पांच बीघा जमीन होने के बावजूद परिवार बढऩे के साथ खर्च और जिम्मेदारियां भी बढ़ती गईं। बच्चों की परवरिश, पढ़ाई और शादी के साथ घर का खर्च चलाने के लिए वह वर्ष 2023 में गाजियाबाद आ गए। मोरटी क्षेत्र में किसान की जमीन ठेके पर लेकर सब्जियां उगाने लगे और परिवार के साथ भोवापुर में झुग्गी बनाकर रहने लगे। सुबह खेत में मेहनत करना और फिर सब्जियां मंडी तक पहुंचाना उनकी दिनचर्या बन गई थी। पत्नी सत्यवती करीब 32 वर्षों से हर मुश्किल में उनके साथ खड़ी थीं। दोनों ने मेहनत कर बच्चों को बड़ा किया और बेहतर भविष्य के सपने देखे। बड़े बेटे जितेंद्र की शादी करीब ढाई वर्ष पहले भारती से हुई थी। उसके एक बेटा है। छोटे बेटे शिवम की शादी महज चार महीने पहले रूबी से हुई थी। नई बहू के आने से घर में खुशियां बढ़ी थीं। दो महीने पहले ही थान सिंह उसे गाजियाबाद लेकर आए थे। रूबी भी अपनी सास के साथ खेत में काम करने लगी थी। सास-बहू के बीच मां-बेटी जैसा रिश्ता था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि दोनों की जिंदगी एक साथ खत्म हो जाएगी।
थान सिंह के परिवार की आजीविका पूरी तरह सब्जियों की खेती पर निर्भर थी। खेत में पालक, मूली, लौकी समेत कई सब्जियां उगाई गई थीं। पत्नी सत्यवती, बहू रूबी और बेटी देवश्री सुबह खेत से सब्जियां तोड़कर ई-रिक्शा में भरती थीं। इसके बाद शिवम उन्हें मंडी में बेचने जाता था। मंगलवार सुबह भी तीनों इसी काम के लिए खेत में पहुंचीं। इसी दौरान टूटी बिजली की लाइन की चपेट में आने से सत्यवती और रूबी की जान चली गई। मां और भाभी को बचाने की कोशिश में देवश्री भी करंट से झुलस गईं। 20 वर्षीय देवश्री के लिए पिता योग्य वर तलाश रहे थे। परिवार की इच्छा थी कि फरवरी में उसकी शादी कर दी जाए। अब हादसे ने इस परिवार के भविष्य के सपनों को भी गहरे संकट में डाल दिया है। छोटे बेटे शिवम की गृहस्थी अभी ठीक से शुरू भी नहीं हुई थी। जिस बहू को चार महीने पहले दुल्हन बनाकर घर लाया गया था, उसकी विदाई अब अंतिम विदाई में बदल गई। जिस घर में नई जिंदगी की शुरुआत हुई थी, वहां सास और बहू दोनों की अर्थियां उठने की तैयारी करनी पड़ी। दोनों के शव लेकर पैतृक गांव रवाना होने से पहले थान सिंह ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार एक ही श्मशान घाट पर किया जाएगा। एसीपी नंदग्राम जियाउद्दीन अहमद के मुताबिक, थान सिंह का परिवार पिछले करीब तीन वर्षों से भोवापुर में रह रहा था और वहीं सब्जियों की खेती करता था। हादसे में दो महिलाओं की मौत और युवती के झुलसने के मामले में पुलिस शिकायत के आधार पर कार्रवाई कर रही है। उधर, पत्नी और बहू को खोने वाले थान सिंह ने न्याय की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी तो बर्बाद हो ही गई है, लेकिन वह हादसे के जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाकर रहेंगे। पैतृक गांव से लौटने के बाद हर अधिकारी की चौखट पर जाकर इंसाफ मांगेंगे। जिस बेहतर जिंदगी की उम्मीद लेकर वह गाजियाबाद आए थे, उसी शहर में एक हादसे ने उनका पूरा संसार उजाड़ दिया।


