कुपोषण पर जीरो टॉलरेंस: डीएम रविन्द्र कुमार मॉंदड़ का बड़ा संदेश, लक्ष्य नहीं पूरा तो होगी जवाबदेही तय-सैम बच्चों की होगी विशेष निगरानी, पोषण पोटली से लेकर छह जरूरी दवाएं और ई-कवच पोर्टल पर पूरी रिपोर्ट अनिवार्य-10 अगस्त तक पात्र बच्चों की सूची और 25 अगस्त तक सभी आवेदन ऑनलाइन कराने के आदेश

गाजियाबाद। जनपद को कुपोषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने योजनाओं के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। गुरुवार को विकास भवन स्थित महात्मा गांधी सभागार में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ की अध्यक्षता में जिला पोषण समिति एवं जिला निगरानी समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन की प्रत्येक योजना का लाभ अंतिम पात्र व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि किसी कार्य में कोई समस्या है तो उसे तत्काल अवगत कराया जाए, उसका समयबद्ध समाधान कराया जाएगा, लेकिन कोई भी कार्य लंबित नहीं रहना चाहिए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी, एनआरसी प्रभारी चिकित्साधिकारी, समस्त बाल विकास परियोजना अधिकारी तथा पोषण अभियान से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। जिला कार्यक्रम अधिकारी विनीता चन्द्रा ने सम्भव अभियान 6.0, आंगनबाड़ी केन्द्रों के संचालन, पोषण ट्रैकर एप, ग्रोथ मॉनिटरिंग, आंगनबाड़ी केन्द्रों के कायाकल्प, पोषण पुनर्वास केन्द्र, एनीमिया नियंत्रण, ईसीसीई किट तथा ई-कवच पोर्टल सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक माह समिति की बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें तथा अपने विभाग से संबंधित योजनाओं की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि केवल आंकड़े प्रस्तुत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि धरातल पर योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन और उनके परिणाम भी स्पष्ट दिखाई देने चाहिए। पोषण ट्रैकर एप की समीक्षा में बताया गया कि जून 2026 के दौरान जनपद में पंजीकृत 1,24,059 बच्चों में से 1,22,284 बच्चों का वजन किया गया, जिससे माप दक्षता 98.57 प्रतिशत दर्ज हुई। जिलाधिकारी ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए निर्देश दिए कि आगामी माह में इसे शत-प्रतिशत तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि कोई भी बच्चा वजन मापन से वंचित नहीं रहना चाहिए तथा सभी गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित की जाए। साथ ही पोषण ट्रैकर पर दर्ज सभी आंकड़ों का नियमित सत्यापन भी किया जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। बैठक में टेक होम राशन एवं मॉर्निंग स्नैक वितरण की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि नई रेसिपी के अनुरूप पोषाहार की आपूर्ति शुरू की जा रही है। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि आपूर्ति शुरू होते ही प्रत्येक लाभार्थी तक समयबद्ध तरीके से वितरण सुनिश्चित किया जाए। वितरण का पूरा विवरण पोषण ट्रैकर एप पर अपलोड किया जाए तथा प्रत्येक वितरण कार्यक्रम की समूह फोटो विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप पर साझा की जाए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। गंभीर कुपोषित (सैम) बच्चों की स्थिति पर विशेष चिंता व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जिन क्षेत्रों में सैम बच्चों की संख्या असामान्य रूप से कम दर्ज हो रही है, वहां विशेष अध्ययन कराया जाए ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। उन्होंने सभी चिन्हित सैम बच्चों को निर्धारित छह आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने, उनका पूरा विवरण ई-कवच पोर्टल पर दर्ज करने तथा नियमित स्वास्थ्य निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। शहरी क्षेत्रों में भी सैम बच्चों की सही पहचान और प्रभावी निगरानी पर विशेष जोर दिया गया। समीक्षा में बताया गया कि जून 2026 के दौरान पोषण ट्रैकर एप के माध्यम से जनपद में 467 सैम तथा 3,040 मैम बच्चों का चिन्हांकन किया गया है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी सैम बच्चों को पोषण पोटली उपलब्ध कराई जाए, उनके स्वास्थ्य में सुधार की नियमित निगरानी की जाए तथा आवश्यकता पडऩे पर उन्हें पोषण पुनर्वास केन्द्रों के माध्यम से चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने सभी मुख्य सेविकाओं और बाल विकास परियोजना अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक माह सैम बच्चों के घर जाकर उनकी पोषण स्थिति का आकलन करें और सुधार की रिपोर्ट प्रस्तुत करें। सम्भव अभियान 6.0 की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर उपलब्ध ग्रोथ मॉनिटरिंग उपकरणों की जानकारी ली। जिन केन्द्रों पर वजन मशीन उपलब्ध नहीं है, उनकी सूची तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए ताकि आवश्यक उपकरण शीघ्र उपलब्ध कराए जा सकें। उन्होंने गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच, प्रसवोत्तर देखभाल तथा कम वजन वाले नवजात शिशुओं की विशेष निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। बैठक के दूसरे चरण में महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की समीक्षा की गई। इसमें निराश्रित महिला पेंशन योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना तथा रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने सभी लंबित आवेदनों का सत्यापन शीघ्र पूर्ण कर उन्हें समयबद्ध तरीके से अग्रसारित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत ऐसे बच्चों की समेकित सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए जिनके माता-पिता में से एक अथवा दोनों का निधन हो चुका है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि 10 अगस्त तक सभी पात्र बच्चों की सूची तैयार कर उपलब्ध कराई जाए तथा 25 अगस्त तक सभी पात्र बच्चों के आवेदन ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर दिए जाएं, ताकि उन्हें समय पर शासन की सहायता प्राप्त हो सके। रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना के अंतर्गत प्राप्त सभी प्रकरणों का जिला संचालन समिति की बैठक आयोजित कर समयबद्ध निस्तारण करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक के अंत में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने कहा कि शासन की प्रत्येक जनकल्याणकारी योजना का उद्देश्य समाज के सबसे जरूरतमंद व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना है। इसलिए सभी अधिकारी पूरी संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करें तथा सुनिश्चित करें कि कोई भी पात्र लाभार्थी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने दोहराया कि लक्ष्य के सापेक्ष प्रत्येक कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण होना चाहिए और यदि किसी स्तर पर कोई बाधा आती है तो उसे तत्काल प्रशासन के संज्ञान में लाया जाए, ताकि उसका समय रहते समाधान कराया जा सके।



