पशुधन सुरक्षा का महाअभियान शुरू: जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ ने टीकाकरण अभियान को दिखाई हरी झंडी, 8 सितंबर तक चलेगा विशेष अभियान

गाजियाबाद, 22 जुलाई। जनपद गाजियाबाद में पशुधन को खुरपका-मुँहपका (फुट एंड माउथ डिजीज-एफएमडी) जैसी अत्यंत संक्रामक और आर्थिक रूप से नुकसानदायक बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए बुधवार से व्यापक नि:शुल्क टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया गया। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ ने मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ एवं मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एस.पी. पाण्डेय की उपस्थिति में टीकाकरण टीमों और विशेष वाहनों को हरी झंडी दिखाकर अभियान की औपचारिक शुरुआत की। यह विशेष अभियान 22 जुलाई से 8 सितंबर 2026 तक जनपद के सभी ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में संचालित किया जाएगा। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एस.पी. पाण्डेय ने बताया कि अभियान के दौरान जनपद के 1 लाख 79 हजार 500 गोवंश एवं महिषवंशीय पशुओं का पूरी तरह नि:शुल्क टीकाकरण किया जाएगा। इसका उद्देश्य पशुओं को खुरपका-मुँहपका जैसी अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी से सुरक्षित रखना, पशुधन की उत्पादकता बढ़ाना तथा पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से बचाना है। उन्होंने कहा कि यह अभियान प्रदेश सरकार की पशुधन संरक्षण एवं पशुपालकों के हितों को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अभियान के तहत केवल टीकाकरण ही नहीं, बल्कि प्रत्येक पशु की डिजिटल पहचान भी सुनिश्चित की जाएगी। सभी पशुओं के कान में ईयर टैग लगाया जाएगा तथा पशुपालकों एवं उनके पशुओं का भारत पशुधन (भारत पशुधन) पोर्टल एवं मोबाइल ऐप पर रियल टाइम पंजीकरण किया जाएगा। इस डिजिटल व्यवस्था से प्रत्येक पशु का टीकाकरण रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और भविष्य में संचालित होने वाली विभिन्न पशुपालन योजनाओं का लाभ पशुपालकों तक आसानी से पहुंच सकेगा। डॉ. एस.पी. पाण्डेय ने बताया कि टीकाकरण कार्य प्रशिक्षित पशु मित्रों द्वारा किया जा रहा है। ये प्रशिक्षित युवक ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार से जुड़े हैं और टीकाकरण के साथ-साथ पोर्टल पर प्रत्येक पशु की ऑनलाइन प्रविष्टि भी करेंगे। पोर्टल पर सफल प्रविष्टि होने के बाद उन्हें प्रति पशु निर्धारित मानदेय प्रदान किया जाएगा। उन्होंने सभी पशुपालकों से आग्रह किया कि वे अपने पशुओं के साथ स्वयं का भी भारत पशुधन पोर्टल पर पंजीकरण अवश्य कराएं, ताकि टीकाकरण का डिजिटल रिकॉर्ड पूर्ण हो सके और योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। विशेषज्ञों के अनुसार खुरपका-मुँहपका (एफएमडी) एक अत्यंत संक्रामक विषाणुजनित रोग है, जो संक्रमित पशु से स्वस्थ पशु में बहुत तेजी से फैलता है। इस बीमारी के कारण पशुओं के मुंह और खुरों में घाव हो जाते हैं, दुग्ध उत्पादन में भारी गिरावट आती है, कार्यक्षमता प्रभावित होती है तथा पशुपालकों को गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में समय पर टीकाकरण ही इस रोग से बचाव का सबसे सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक उपाय माना जाता है। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ ने कहा कि पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला है और इसकी सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान निर्धारित समयसीमा के भीतर शत-प्रतिशत लक्ष्य के साथ पूरा किया जाए तथा किसी भी पात्र पशु को टीकाकरण से वंचित न रहने दिया जाए। उन्होंने अभियान की नियमित निगरानी करने और प्रत्येक क्षेत्र में प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। जनपद प्रशासन एवं पशुपालन विभाग ने सभी पशुपालकों, जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों, नगर निकायों तथा सामाजिक संगठनों से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की है।



