बाढ़-कटान का पुराना दर्द, समाधान अब भी अधूरा,शारदा किनारे हर साल तबाही, कब बनेगी स्थायी कार्ययोजना?

वेलकम इंडिया पीलीभीत
पूरनपुर/पीलीभीत। शारदा नदी का कटान हर वर्ष किसानों और ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बनकर सामने आता है। बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर और तेज बहाव बढ़ते ही किनारों पर कटान शुरू हो जाता है। देखते ही देखते किसानों की उपजाऊ जमीन और खड़ी फसलें नदी की धार में समाने लगती हैं। कई स्थानों पर ग्रामीणों के घरों और संपर्क मार्गों पर भी खतरा मंडराने लगता है। इसके बावजूद स्थायी कटान निरोधक व्यवस्था को लेकर सवाल लगातार उठते रहे हैं।
हाल में राणा प्रतापनगर में कटान की स्थिति गंभीर होने पर राजस्व एवं सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लेने के बाद युद्ध स्तर पर कटान निरोधक कार्य शुरू कराया। प्रशासन की ओर से दावा किया गया कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। इसी तरह नेहरोसा गांव में भी कटान की सूचना मिलने पर विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक निरोधक कार्य कराए।हालांकि इन तात्कालिक प्रयासों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शारदा नदी के कटान का खतरा हर वर्ष बना रहता है, तो प्रशासन की तैयारियां कटान शुरू होने के बाद ही क्यों तेज होती हैं? क्या बरसात से पहले संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर वहां स्थायी और मजबूत कटान निरोधक परियोजनाएं नहीं बनाई जा सकतीं?ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बरसात आते ही कटान की समस्या सामने आती है। इसके बाद अधिकारियों का निरीक्षण, बचाव कार्य, आश्वासन और नुकसान के आकलन का सिलसिला शुरू हो जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते संवेदनशील तटबंधों और नदी किनारों पर मजबूत सुरक्षा व्यवस्था कर दी जाए तो बड़े नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।सवाल यह भी है कि जब कटान रोकने के लिए लाखों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, तो इसके बावजूद हर साल वही समस्या दोबारा क्यों खड़ी हो जाती है? यदि बचाव कार्य वास्तव में युद्ध स्तर पर किए जा रहे हैं, तो फिर बाढ़ और कटान की स्थिति क्यों उत्पन्न हो रही है?शारदा नदी से प्रभावित ग्रामीण अब केवल अस्थायी राहत नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन बरसात समाप्त होने के बाद अगले वर्ष की तैयारी का इंतजार न करे, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वे कराकर दीर्घकालिक कटान निरोधक योजना तैयार करे। अब निगाहें इस बात पर हैं कि मौजूदा बचाव कार्य के बाद प्रशासन स्थायी समाधान की दिशा में क्या कदम उठाता है।



