ग़ाज़ियाबाद

एक्सप्रेसवे पर नहीं चलेगी कांवड़; सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर रहेगा हाई अलर्ट

गाजियाबाद। आगामी कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए शासन ने इस वर्ष बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। अब कांवड़ यात्रियों को एक्सप्रेसवे पर चलने की अनुमति नहीं होगी। शासन स्तर पर आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसके तहत कांवडिय़ों के लिए वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि यात्रा शुरू होने से पहले कांवड़ मार्गों की सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध ढंग से पूरी कर ली जाएं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
सोमवार को प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और हरियाणा के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर कांवड़ यात्रा की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में मंडलायुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, उपमहानिरीक्षक, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। समीक्षा के दौरान गाजियाबाद सहित सभी जिलों को निर्देशित किया गया कि एक सप्ताह के भीतर कांवड़ मार्गों की मरम्मत, सड़क प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, बैरिकेडिंग और साफ-सफाई सहित सभी आवश्यक कार्य पूर्ण कर लिए जाएं। गाजियाबाद के अपर जिलाधिकारी (नगर) विकास कश्यप ने बताया कि जिन स्थानों पर कांवड़ मार्ग एक्सप्रेसवे से जुड़ते हैं, वहां विशेष रूप से एक्सप्रेसवे मित्र तैनात किए जाएंगे। जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी कांवडिय़ा एक्सप्रेसवे पर प्रवेश न कर सके। श्रद्धालुओं को सुरक्षित वैकल्पिक मार्गों से उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी, जिससे यात्रा भी सुरक्षित रहे और एक्सप्रेसवे पर यातायात भी प्रभावित न हो। शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी जिले में सामान्य यातायात व्यवस्था बाधित नहीं होनी चाहिए। यात्रा के प्रत्येक चरण की निगरानी मंडल स्तर पर की जाएगी और श्रद्धालुओं की संख्या, प्रमुख आयोजनों तथा यातायात की स्थिति की नियमित जानकारी साझा की जाएगी, ताकि आवश्यकता पडऩे पर तत्काल निर्णय लिए जा सकें। यात्रा की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पूरे कांवड़ मार्ग पर 1275 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाएगी। 193 स्थानों पर पुलिस बल तैनात रहेगा, जबकि सुरक्षा व्यवस्था के लिए 1437 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इसके अलावा 17 उच्च स्तरीय स्थायी बैरियर स्थापित किए जाएंगे। संपूर्ण कांवड़ मार्ग को बेहतर प्रबंधन के लिए तीन सुपर जोन, 11 जोन और 24 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रशासन ने 157 कांवड़ शिविरों और 12 प्रवेश द्वारों को भी चिन्हित कर वहां विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जनपद की 21 प्रमुख सड़कों को कांवड़ यात्रा के लिए तैयार किया जा रहा है। नगर निगम, लोक निर्माण विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियां सड़क मरम्मत, सफाई, प्रकाश व्यवस्था और अन्य आवश्यक कार्यों में युद्धस्तर पर जुटी हुई हैं। अधिकारियों के अनुसार इन मार्गों की कुल लंबाई लगभग 100 किलोमीटर है और इन्हीं रास्तों से प्रतिदिन लाखों कांवड़ यात्री गुजरेंगे। सभी विभागों को निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूर्ण कर शासन को अनुपालन रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं। यात्रा के दौरान बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई के लिए मेरठ रेंज का मुख्य नियंत्रण कक्ष पूरी तरह सक्रिय रहेगा। इसके अतिरिक्त जनपद में चार स्थानीय नियंत्रण कक्ष और आठ सहायता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। प्रमुख मार्गों पर 33 वायरलेस जनसंपर्क प्रणाली और 26 लाउडस्पीकर लगाए जाएंगे, जिनके माध्यम से श्रद्धालुओं को आवश्यक सूचनाएं एवं दिशा-निर्देश समय-समय पर उपलब्ध कराए जाएंगे। स्वास्थ्य सेवाओं को भी प्राथमिकता देते हुए जिले के 29 अस्पतालों में 150 बिस्तर कांवड़ यात्रियों के लिए आरक्षित किए गए हैं। चिकित्सा विभाग की 24 मोबाइल चिकित्सा टीमें पूरे मार्ग पर लगातार भ्रमण कर श्रद्धालुओं को तत्काल उपचार उपलब्ध कराएंगी। वहीं, जिले के प्रमुख आस्था केंद्र दूधेश्वरनाथ मंदिर को संवेदनशील श्रेणी में रखते हुए वहां विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा। मंदिर परिसर और आसपास की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए अलग से नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम दर्शन व्यवस्था हर स्थिति में सुनिश्चित की जा सके।

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