ई-पंजीकरण व्यवस्था के विरोध में बैनामा लेखकों का अनिश्चितकालीन धरना, एक भी रजिस्ट्री नहीं हुई
गाजियाबाद। प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित ई-पंजीकरण व्यवस्था के विरोध में बैनामा लेखकों ने गुरुवार से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया। विरोध स्वरूप जिले के सदर तहसील, मोदीनगर और लोनी स्थित निबंधन कार्यालयों में बैनामा लेखकों ने अपने बस्ते नहीं खोले, जिसके चलते दिनभर एक भी बैनामा नहीं हो सका। दस्तावेज लेखक एसोसिएशन गाजियाबाद के अध्यक्ष गौरव चौधरी के नेतृत्व में बैनामा लेखकों ने रजिस्ट्री कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि सरकार ई-पंजीकरण प्रक्रिया लागू कर बैनामों का कार्य निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी कर रही है, जिससे प्रदेश के लाखों बैनामा लेखकों और उनसे जुड़े लोगों की आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि यह व्यवस्था लागू हुई तो पारंपरिक रूप से कार्य कर रहे दस्तावेज लेखकों के सामने बेरोजगारी और आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सरकार इस निर्णय को वापस नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
मोदीनगर तहसील में भी बैनामा लेखक संघ के सदस्य सुबह एकत्र हुए और नारेबाजी करते हुए रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने मुख्य द्वार पर धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि जमीन और मकानों के बैनामों का कार्य किसी भी कीमत पर निजी कंपनियों को नहीं सौंपा जाएगा। आंदोलन के चलते मोदीनगर तहसील में पूरे दिन एक भी बैनामा नहीं हुआ। लोनी तहसील में भी बैनामा लेखकों ने हड़ताल कर विरोध दर्ज कराया। तीनों तहसीलों में कामकाज प्रभावित रहा और बैनामा कराने पहुंचे लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा। वहीं, इस संबंध में सहायक महानिरीक्षक निबंधन एस.बी. चंद्रा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ई-पंजीकरण व्यवस्था केवल जीडीए, आवास विकास परिषद और यूपीएसआईडीसी जैसी संस्थाओं द्वारा पहली बार किए जाने वाले बैनामों पर लागू होगी। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था सामान्य श्रेणी के विलेखों अथवा आम नागरिकों के बैनामों पर लागू नहीं की जा रही है। इसके बावजूद बैनामा लेखक संगठन सरकार के स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने आंदोलन को आगे भी जारी रखने का ऐलान किया है।


