भट्ठों से जलवायु तक: मजदूरों की आवाज़ को केंद्र में लाने की पहल

“तपते भट्ठे, बदलता मौसम” कार्यक्रम में उठेंगे श्रम, जलवायु और अधिकारों के सवाल
संदीप तिवारी
वाराणसी मिर्जामुराद। चंबल मीडिया द्वारा “बुनियाद पहल” के अंतर्गत “तपते भट्ठे, बदलता मौसम: जमीनी कहानियाँ और जलवायु संवाद” कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य ईंट भट्ठा मजदूर समुदायों के जीवन, संघर्ष और जलवायु परिवर्तन से जुड़े अनुभवों को सार्वजनिक और नीतिगत चर्चाओं के केंद्र में लाना है।कार्यक्रम में ईंट भट्ठा मजदूरों की बदलती कामकाजी परिस्थितियों,बढ़ती गर्मी,अनियमित बारिश,पलायन,स्वास्थ्य संकट और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा होगी। आयोजकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक असर उन समुदायों पर पड़ रहा है,जो खुले वातावरण में कठिन श्रम करने को मजबूर हैं, लेकिन उनकी आवाज़ें अब भी मुख्यधारा की चर्चाओं से गायब हैं। इस अवसर पर “चार्टर ऑफ डिमांड्स” भी प्रस्तुत किया जाएगा,जो उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के मजदूरों और समुदायों के अनुभवों पर आधारित है। इसमें सुरक्षित कार्यस्थल,श्रम अधिकारों का पालन,स्वास्थ्य व शिक्षा तक पहुंच,प्रवासी मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा तथा पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देने जैसी मांगें शामिल हैं। कार्यक्रम में “उड़ान फेलोशिप” से जुड़े युवाओं की जमीनी रिपोर्टिंग और कहानियों को भी साझा किया जाएगा। चंबल अकादमी द्वारा प्रशिक्षित इन युवाओं ने मोबाइल पत्रकारिता के माध्यम से जलवायु संकट को मजदूरों के रोजमर्रा के जीवन से जोड़कर सामने रखा है। इसके साथ ही “क्लाइमेट विज़ुअल मैप”, फिल्म स्क्रीनिंग और राउंडटेबल चर्चा का आयोजन भी होगा,जिसमें पत्रकार,शोधकर्ता,जलवायु विशेषज्ञ,मजदूर और सामाजिक संगठन शामिल होंगे। यह कार्यक्रम जलवायु न्याय,श्रम अधिकार और समुदाय आधारित कहानी कहने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।



