70 वर्षीय वृद्धा की पीड़ा सुन भावुक हुए जिलाधिकारी, पेंशन बहाली के निर्देश के साथ दी 22 हजार रुपये की आर्थिक सहायता

गाजियाबाद। जनपद में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ के नेतृत्व में संचालित विशेष अभियान ‘गरीब का गृह प्रवेश’ अब गरीबों, बेसहारों और पीडि़त लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रहा है। अभियान के माध्यम से प्रशासन लगातार ऐसे लोगों को उनकी जमीन, मकान और अन्य संपत्तियों पर हुए अवैध कब्जों से मुक्ति दिलाने का कार्य कर रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। यही कारण है कि कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में सहायता और न्याय की उम्मीद लेकर आने वाले जरूरतमंदों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने कहा कि प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप प्रशासन समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने के लिए पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने जनपदवासियों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी गरीब, कमजोर या असहाय व्यक्ति की भूमि, मकान अथवा अन्य संपत्ति पर किसी भू-माफिया, दबंग या असामाजिक तत्व द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया है और उसके पास वैध दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो वह बिना किसी भय के सीधे प्रशासन से संपर्क कर सकता है। प्रशासन ऐसे प्रत्येक पात्र व्यक्ति को न्याय दिलाने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि गरीबों की संपत्तियों की रक्षा करना और उन्हें उनका अधिकार दिलाना माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी सोच को धरातल पर उतारने के लिए ‘गरीब का गृह प्रवेश’ अभियान प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है, जिसके तहत कई जरूरतमंद परिवारों को उनकी संपत्तियों का पुन: अधिकार दिलाया जा चुका है। इसी दौरान कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में एक ऐसा भावुक कर देने वाला मामला सामने आया, जिसने प्रशासन की मानवीय संवेदनशीलता को भी उजागर किया। वसुंधरा सेक्टर-3 निवासी 70 वर्षीय वृद्ध महिला श्रीमती सत्या शर्मा ने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी व्यथा रखी। उन्होंने बताया कि लंबे समय से उन्हें विधवा पेंशन प्राप्त नहीं हो रही है और आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद उनका आयुष्मान कार्ड भी नहीं बन पाया है, जिससे उन्हें स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा। वृद्धा की समस्या सुनते ही जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए। उन्होंने मौके पर ही वृद्ध महिला का आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी कराई तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों से वार्ता कर यह सुनिश्चित कराया कि जुलाई माह से उनकी विधवा पेंशन पुन: शुरू हो जाए। इस दौरान जिलाधिकारी ने केवल प्रशासनिक अधिकारी के रूप में ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील इंसान के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। वृद्ध महिला की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने हाल ही में परीक्षा ड्यूटी से प्राप्त अपना मानदेय, जो लगभग 22 हजार रुपये था, स्वयं उन्हें आर्थिक सहायता के रूप में प्रदान कर दिया। जिलाधिकारी के इस मानवीय और प्रेरणादायक कदम ने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया। उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासनिक पद पर रहते हुए इस प्रकार की संवेदनशीलता समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है। जनसुनवाई के दौरान मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे और उन्होंने लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनकर उनके त्वरित निस्तारण के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की। ‘गरीब का गृह प्रवेश’ अभियान और जिलाधिकारी की मानवीय कार्यशैली यह संदेश दे रही है कि प्रशासन केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए भी पूरी निष्ठा से कार्य कर रहा है। यही कारण है कि अब अधिक से अधिक लोग न्याय और सहायता की उम्मीद लेकर प्रशासन के दरवाजे तक पहुंच रहे हैं और उन्हें राहत भी मिल रही है।

