बृजवासियों की मिठास पर महंगाई की मार, चीनी बनी आर्थिक बोझ
मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ पारंपरिक मिठाइयों के लिए भी देशभर में प्रसिद्ध है। मथुरा का पेड़ा, रबड़ी, लड्डू और अन्य मिष्ठान न केवल ब्रजवासियों की पहचान हैं, बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की पहली पसंद भी हैं। ऐसे में चीनी की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों के साथ-साथ मिठाई कारोबार से जुड़े व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है।
पिछले तीन महीनों में चीनी के दामों में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। जून और जुलाई में चीनी का थोक भाव 4400 रुपये प्रति क्विंटल था, लेकिन अगस्त में इसमें अचानक उछाल आ गया और कीमत 5900 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई। यानी महज दो महीने में चीनी के दाम में 1500 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।
बढ़ती कीमतों का सीधा असर मथुरा के प्रसिद्ध मिठाई उद्योग पर पड़ने की आशंका है। ब्रज क्षेत्र में हजारों परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से दूध और मिष्ठान व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। ऐसे में चीनी के दाम बढ़ने से मिठाइयों के निर्माण की लागत लगातार बढ़ रही है।
111 साल पुरानी चीनी फर्म के मंडी समिति के वरिष्ठ व्यापारी अनुराग अग्रवाल ने चीनी की बढ़ती कीमतों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि चीनी केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं है, बल्कि यह आम लोगों के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। चाय से लेकर मिठाइयों तक हर घर में चीनी का उपयोग होता है। ऐसे में इसकी कीमतों में लगातार वृद्धि आम लोगों के बजट को प्रभावित कर रही है।
उन्होंने कहा कि त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है और आने वाले दिनों में जन्माष्टमी, राधाष्टमी, नवरात्र, दशहरा, दीपावली और अन्य धार्मिक आयोजनों के कारण मिठाइयों की मांग बढ़ जाएगी। यदि चीनी की कीमतों में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो मिठाइयों के दाम बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।
अनुराग अग्रवाल ने मीडिया के माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा कि बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते आवश्यक निर्णय नहीं लिए गए तो महंगाई का असर सीधे आमजन पर पड़ेगा।
व्यापारियों का मानना है कि ब्रज में धार्मिक आयोजनों, मंदिरों में भोग, प्रसाद और पारिवारिक कार्यक्रमों में मिठाइयों का विशेष महत्व होता है। ऐसे में चीनी के दामों में आई तेजी का असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह हर वर्ग की रसोई तक पहुंचेगा। अब सभी की निगाहें सरकार पर टिकी हैं कि बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।


