एमएमजी अस्पताल में ट्रेनिंग के नाम पर 25 से 40 हजार रुपये लेने का आरोप, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप
गाजियाबाद। एमएमजी अस्पताल से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया है। वायरल वीडियो में कुछ लोग अस्पताल के सीएमएस और एक बाबू पर ट्रेनिंग कराने के नाम पर कथित तौर पर 25 से 40 हजार रुपये तक लेने के गंभीर आरोप लगाते नजर आ रहे हैं। वीडियो अस्पताल के कर्मचारियों के मोबाइल फोन पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसके बाद अस्पताल में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वायरल वीडियो में आरोप लगाने वाले लोगों की ओर से दावा किया जा रहा है कि ट्रेनिंग के नाम पर उनसे अलग-अलग रकम ली गई। आरोपों में 25 हजार से लेकर 40 हजार रुपये तक लिए जाने की बात कही जा रही है। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल के कर्मचारियों के बीच मामला चर्चा का विषय बन गया। हालांकि वीडियो में लगाए गए आरोपों को लेकर कोई स्वतंत्र साक्ष्य सामने नहीं आया है और न ही वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि हुई है।
मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से भी स्थिति स्पष्ट की गई है। एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. राकेश कुमार ने वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ साजिश के तहत इस प्रकार के आरोप लगाए जा रहे हैं और उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। डॉ. राकेश कुमार के अनुसार, ट्रेनिंग के दौरान किसी भी डॉक्टर ने उनसे पैसे लिए जाने को लेकर कोई शिकायत नहीं की थी। उनका कहना है कि यदि ट्रेनिंग के दौरान किसी व्यक्ति से रकम लिए जाने जैसी कोई बात सामने आती तो अस्पताल प्रशासन मामले को गंभीरता से लेता और उसकी जांच कराई जाती। उन्होंने कहा कि ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इस तरह के आरोप लगाया जाना दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होता है। सीएमएस ने कहा कि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि कुछ लोग योजनाबद्ध तरीके से उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से मामले को लेकर अभी किसी प्रकार की आधिकारिक शिकायत या जांच की जानकारी सामने नहीं आई है। वायरल वीडियो के कारण अस्पताल के कर्मचारियों के बीच चर्चा जरूर तेज हो गई है। कर्मचारी अपने-अपने स्तर पर वीडियो को लेकर जानकारी साझा कर रहे हैं। वहीं, मामले में सबसे अहम सवाल यही बना हुआ है कि वीडियो में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता क्या है और यदि रकम लिए जाने का दावा सही है तो इसके पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं। फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर अस्पताल प्रशासन और संबंधित पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होने के कारण आरोपों को सत्यापित तथ्य नहीं माना जा सकता। मामले में यदि कोई औपचारिक शिकायत सामने आती है तो उसके आधार पर जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



