40 हजार के लक्ष्य के सामने हजार का आंकड़ा भी नहीं छू सका स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की कार्यशैली पर उठे सवाल

गाजियाबाद। सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से किशोरियों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किए गए निश्शुल्क एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान की रफ्तार गाजियाबाद में बेहद धीमी बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि 40 हजार किशोरियों के टीकाकरण के लक्ष्य के मुकाबले अब तक एक हजार का आंकड़ा भी पार नहीं हो सका है। जिला स्वास्थ्य समिति को भेजी गई 27 मई तक की रिपोर्ट ने अभियान की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। कई शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (यूपीएचसी) पर एक या दो किशोरियों को ही टीका लगाया गया है। अब स्वास्थ्य विभाग ऐसे केंद्रों पर तैनात चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है। जिले में पहली बार 11 मार्च को जिला महिला अस्पताल से 14 वर्षीय किशोरियों के लिए निश्शुल्क एचपीवी टीकाकरण अभियान की शुरुआत की गई थी। इसके बाद जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीन उपलब्ध करा दी गई। बावजूद इसके अभियान अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका। स्वास्थ्य विभाग किशोरियों को टीकाकरण केंद्रों तक लाने और अभिभावकों को जागरूक करने में सफल नहीं हो पाया है। 27 मई तक की समीक्षा रिपोर्ट में कई ऐसे स्वास्थ्य केंद्र सामने आए हैं, जहां टीकाकरण की स्थिति बेहद निराशाजनक रही। यूपीएचसी बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र और यूपीएचसी कैलाभट्टा में केवल एक-एक किशोरी को टीका लगाया गया। वहीं यूपीएचसी विजयनगर-2, घूकना और सद्दीकनगर में महज दो-दो किशोरियों का टीकाकरण हुआ। शालीमार गार्डन में चार, वेद विहार में पांच, भोपुरा में सात, विजयनगर-1 में आठ, करहैड़ा और साधना एन्क्लेव खोड़ा में नौ-नौ तथा सरस्वती कॉलोनी में केवल दस किशोरियों को ही टीका लगाया जा सका। इसके अलावा मकनपुर और वसुंधरा में 11-11, खोड़ा गांव और कार्ते शास्त्रीनगर में 12-12 तथा शहीदनगर में केवल 14 किशोरियों का टीकाकरण दर्ज किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि अभियान की धीमी रफ्तार के पीछे सबसे बड़ी वजह एचपीवी वैक्सीन को लेकर लोगों में फैली भ्रांतियां और जागरूकता की कमी है। स्कूलों में टीकाकरण से पहले अभिभावकों की लिखित सहमति अनिवार्य होने के कारण भी बड़ी संख्या में किशोरियां टीका लगवाने से वंचित रह गई हैं। वहीं कई स्कूलों में इस अभियान को लेकर अपेक्षित स्तर पर जनजागरूकता कार्यक्रम भी नहीं चलाए गए। स्वास्थ्य विभाग ने अब अभियान को गति देने के लिए नई रणनीति तैयार की है। अधिकारियों के अनुसार व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाएगा और लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाकर एचपीवी वैक्सीन से जुड़ी भ्रांतियों को दूर किया जाएगा। कम प्रदर्शन वाले स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को क्षेत्र में घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभियान में रुचि न लेने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी, ताकि सर्वाइकल कैंसर से बचाव की इस महत्वपूर्ण योजना को प्रभावी ढंग से सफल बनाया जा सके।



