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जनता सेवा’ या मौत का सौदागर? बिना डिग्री के डॉक्टर ने किया ऑपरेशन, नवजात की मौत, प्रसूता गंभीर

वेलकम इण्डिया/असदुल्लाह सिद्दीकी

इटवा/सिद्धार्थनगर। जिले में स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे चल रहे अवैध और लापरवाह निजी अस्पतालों का एक और खौफनाक चेहरा सामने आया है। इटवा तहसील क्षेत्र में संचालित ‘जनता सेवा हॉस्पिटल’ पर एक बार फिर गंभीर लापरवाही के कारण नवजात शिशु की जान लेने का आरोप लगा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि बिना जरूरी जांच और बिना किसी वैध डिग्री के, अस्पताल के संचालक ने महिला का ऑपरेशन (सिजेरियन) कर दिया, जिससे नवजात की मौत हो गई और प्रसूता जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है।
बिना अल्ट्रासाउंड और हार्टबीट जांचे पेट पर चला दी छुरी!
मामला इटवा थाना क्षेत्र का है। पीड़ित परिवार के अनुसार, गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर सबसे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) इटवा ले जाया गया था। वहां के डॉक्टरों ने बताया कि नॉर्मल डिलीवरी संभव नहीं है और सीजर (ऑपरेशन) करना पड़ेगा, लेकिन CHC में इसकी व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें बाहर रेफर कर दिया गया।
इसके बाद परिजन महिला को पास के ही ‘जनता सेवा हॉस्पिटल’ ले गए। आरोप है कि अस्पताल में तैनात कथित डॉक्टर राकेश यादव ने बिना महिला का अल्ट्रासाउंड किए और बिना बच्चे की धड़कन (हार्टबीट) जांचे सीधे ऑपरेशन कर दिया। पीड़ित सिद्धार्थ कुमार का कहना है कि अस्पताल में मौजूद उनकी माता लगातार डॉक्टरों से बच्चे की हार्टबीट चेक करने की मिन्नतें करती रहीं, लेकिन किसी ने उनकी एक न सुनी।
बस्ती रेफर होते ही नवजात घोषित मृत, मां की हालत नाजुक
ऑपरेशन के तुरंत बाद जच्चा और बच्चा दोनों की हालत बिगड़ने लगी। अस्पताल प्रशासन ने अपनी गर्दन फंसती देख आनन-फानन में दोनों को बस्ती जिले के लिए रेफर कर दिया। पीड़ित परिवार जब प्रसूता और नवजात को लेकर बस्ती पहुंचा, तो वहां के डॉक्टरों ने जांच के बाद नवजात शिशु को मृत घोषित कर दिया। वहीं, प्रसूता की हालत अब भी अत्यंत गंभीर बनी हुई है।बिना किसी जांच और बिना बच्चे की धड़कन नापे मेरे बच्चे का ऑपरेशन कर दिया गया। जब हालत बिगड़ी तो बस्ती रेफर कर दिया, जहां डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई।
बड़ा खुलासा: पूर्व में भी सील हुआ अस्पताल, नाम बदलकर फिर शुरू हुआ मौत का खेल
इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल संचालकों के बीच के कथित गठजोड़ का एक बड़ा खुलासा हुआ है। परिजनों का दावा है कि यह अस्पताल कोई नया नहीं है। इससे पहले भी यह ”सेवा हॉस्पिटल” के नाम से संचालित था और भारी अनियमितताओं के कारण इसे प्रशासन द्वारा सील कर दिया गया था। लेकिन कुछ ही समय बाद, स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्ट तंत्र की मिलीभगत से इसका नाम बदलकर ”जनता सेवा हॉस्पिटल”*कर दिया गया और मौत का यह धंधा दोबारा शुरू हो गया। आरोप है कि हर बार बड़ा मामला सामने आने पर विभागीय जिम्मेदारों को मोटी रकम देकर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है।
*शहर से बाहर हैं साहब! CMO बोले- आने के बाद करेंगे जांच*
जब इस बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले को लेकर जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) डॉ. रजत चौरसिया से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने खुद के शहर से बाहर होने की बात कही। सीएमओ ने फोन पर बताया कि वह फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन जिले में वापस लौटने के बाद मामले की पूरी जांच कराएंगे और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
सिस्टम पर बड़े सवाल: आखिर कितनी और मौतों का इंतजार?
यह घटना सिर्फ एक अस्पताल की लापरवाही का नतीजा नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य सिस्टम के वेंटिलेटर पर होने का सबूत है।

  • आखिर विभागीय अधिकारियों की नाक के नीचे सील हुआ अस्पताल नाम बदलकर कैसे चल रहा था?
  • बिना वैध डिग्री के राकेश यादव जैसे कथित डॉक्टर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कैसे कर रहे हैं?
  • क्या स्वास्थ्य विभाग सिर्फ किसी मासूम की मौत के बाद ही जांच का रटा-रटाया बयान जारी करने के लिए बैठा है?
    घटना के बाद से पीड़ित परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों ने अस्पताल संचालक, कथित डॉक्टर राकेश यादव और मामले को दबाने वाले विभागीय अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई और एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की है।

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