फर्जी गैस डिलीवरी मामले में जांच शुरू, एजेंसी पर उठे गंभीर सवाल

उपभोक्ताओं ने की कड़ी कार्रवाई की मांग, प्रशासन आया हरकत में
स्याना.(बुलंदशहर) खानपुर कस्बे में गैस सिलेंडरों की कथित फर्जी डिलीवरी और उपभोक्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इस पूरे प्रकरण को लेकर उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, खानपुर क्षेत्र में कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें गैस सिलेंडर की डिलीवरी का मैसेज तो प्राप्त हो जाता है, लेकिन वास्तविकता में सिलेंडर उनके घर तक पहुंचता ही नहीं। इस संबंध में शिकायत मिलने के बाद जिला आपूर्ति विभाग हरकत में आया और स्थानीय आपूर्ति निरीक्षक को जांच के निर्देश दिए गए।
जांच के दौरान संबंधित गैस एजेंसी के डिलीवरी रजिस्टर और ऑनलाइन एंट्री का मिलान किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में कई गड़बड़ियों के संकेत मिले हैं। यदि जांच में अनियमितता या लापरवाही की पुष्टि होती है, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शिकायतकर्ता एडवोकेट हितेश कुमार ने बताया कि 12 अप्रैल को उन्हें गैस सिलेंडर की डिलीवरी पूर्ण होने का मैसेज मिला, जबकि उनके घर सिलेंडर पहुंचा ही नहीं। जब उन्होंने एजेंसी से संपर्क किया तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसी कर्मचारी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेते और उपभोक्ताओं को बार-बार चक्कर कटवाते हैं। जांच के दौरान कई अन्य उपभोक्ताओं ने भी अपनी समस्याएं सामने रखीं। एक स्थानीय निवासी देवेंद्र लडाना ने बताया कि उनकी गैस बुकिंग के कई दिन बाद भी सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया गया, जबकि रिकॉर्ड में डिलीवरी दिखा दी गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित न होकर व्यापक स्तर पर फैली समस्या हो सकता है। कुछ उपभोक्ताओं ने एजेंसी कर्मचारियों पर अभद्र व्यवहार और गैस देने से मना करने के भी आरोप लगाए हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि कभी तकनीकी समस्या का बहाना बनाकर उन्हें टाल दिया जाता है, तो कभी बिना समाधान के वापस लौटा दिया जाता है।
क्षेत्र में बढ़ते आक्रोश के बीच लोगों का कहना है कि डिलीवरी मैसेज पहले भेज दिया जाता है, जबकि सिलेंडर बाद में या कई बार बिल्कुल नहीं पहुंचता। इस कारण उपभोक्ताओं को खुद एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती है।
शिकायत व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि एजेंसी परिसर में शिकायत या सुझाव पेटिका तक उपलब्ध नहीं है। वहीं ग्रामीण उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन शिकायत प्रणाली को जटिल बताते हुए इसे सरल और सुलभ बनाने की मांग की है, ताकि कम पढ़े-लिखे लोग भी आसानी से अपनी समस्या दर्ज करा सकें। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों और सीमित आय वाले परिवारों पर इस समस्या का अधिक प्रभाव पड़ रहा है। उनका कहना है कि रसोई गैस उनकी दैनिक जरूरत है और इस प्रकार की अनियमितता उनके जीवन पर सीधा असर डालती है। प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाएगी। यदि फर्जी डिलीवरी या उपभोक्ताओं के साथ दुर्व्यवहार की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुदृढ़ और जवाबदेह व्यवस्था लागू करने की बात भी कही गई है। फिलहाल जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले का खुलासा हो सकेगा, लेकिन इस घटना ने गैस वितरण व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



