ग़ाज़ियाबाद

सख्त निगरानी, तेज कार्रवाई और मजबूत टीमवर्क से आबकारी विभाग ने लिखी सफलता की नई कहानी-गाजियाबाद बना प्रदेश में राजस्व और अनुशासन का मॉडल-वर्ष 2025-26 में 2130 करोड़ लक्ष्य के सापेक्ष 1889.23 करोड़ राजस्व संग्रह

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश में आबकारी विभाग को प्रदेश सरकार के प्रमुख राजस्व स्रोतों में गिना जाता है, लेकिन गाजियाबाद जनपद में यह विभाग केवल राजस्व संग्रह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानून व्यवस्था, सामाजिक अनुशासन और जनसुरक्षा का मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है। दिल्ली से सटे संवेदनशील जिले में आबकारी विभाग की जिम्मेदारी अन्य जिलों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण रहती है, फिर भी जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम और उनकी टीम ने प्रभावी कार्यशैली से उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। जिला आबकारी अधिकारी के नेतृत्व में आबकारी निरीक्षक मनोज शर्मा, अखिलेश कुमार, कीर्ति सिंह, चमन सिंह, अनुज वर्मा, चन्द्रजीत सिंह और दिनेश सहित पूरी टीम ने समन्वित रणनीति अपनाते हुए विभागीय नीतियों को सख्ती और पारदर्शिता के साथ लागू किया है। हाल ही में कुछ निरीक्षकों द्वारा जिले का कार्यभार संभालने के बावजूद कम समय में ही टीम ने मजबूत प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित कर दिया है। गाजियाबाद जनपद प्रदेश के उन प्रमुख जिलों में शामिल है जहां राजस्व की अपेक्षा सबसे अधिक रहती है। दिल्ली सीमा से सटे होने के कारण यहां अन्य राज्यों से शराब तस्करी की संभावना बनी रहती है, लेकिन लगातार चेकिंग अभियान, प्रवर्तन कार्रवाई और खुफिया निगरानी के माध्यम से विभाग ने तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाया है। विभागीय टीम द्वारा संयुक्त अभियान चलाकर अवैध नेटवर्क को ध्वस्त किया गया, जिससे राजस्व हानि पर रोक लगी। राजस्व आंकड़ों पर नजर डालें तो विभाग की कार्यशैली की सफलता स्पष्ट दिखाई देती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनपद को 2130 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके सापेक्ष टीम ने 1889.23 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। इससे पहले वर्ष 2024-25 में भी विभाग ने 1615.32 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त कर प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। लगातार बढ़ते आंकड़े यह दर्शाते हैं कि विभाग हर वर्ष अपने ही रिकॉर्ड को पीछे छोड़ रहा है।
मासिक स्तर पर भी राजस्व वृद्धि का क्रम जारी है। वर्ष 2024-25 के मार्च माह में 120.68 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ था, जबकि अगले वर्ष मार्च माह में यह आंकड़ा बढ़कर 139.44 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह वृद्धि विभाग की सतत निगरानी, अनुशासित कार्यप्रणाली और टीमवर्क का परिणाम मानी जा रही है। अवैध शराब निर्माण पर रोक लगाने के लिए हिंडन खादर क्षेत्र में विशेष अभियान चलाया गया। यह क्षेत्र पहले अवैध शराब निर्माण के लिए चिन्हित माना जाता था, लेकिन लगातार छापेमारी और सख्त कार्रवाई के कारण अवैध भट्टियों पर पूरी तरह ताला लग गया है। इससे न केवल राजस्व में वृद्धि हुई, बल्कि जहरीली शराब जैसी घटनाओं की आशंका भी समाप्त हुई है। जिला आबकारी अधिकारी ने जनसुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी लाइसेंसी शराब कारोबारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। आदेश दिए गए हैं कि शराब की दुकानों के बाहर या सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार का शराब सेवन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति खुले में शराब पीते हुए पाया जाता है तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि खुले में शराब सेवन से सामाजिक वातावरण प्रभावित होता है, दुर्घटनाओं और विवादों की संभावना बढ़ती है तथा परिवार के साथ आने-जाने वाले लोगों में असुरक्षा की भावना उत्पन्न होती है। इसलिए लाइसेंसी दुकानों के पास संचालित कैंटीन अथवा निजी स्थानों पर ही शराब सेवन की अनुमति है। दुकानदारों को निर्देश दिए गए हैं कि नियमों का पालन सुनिश्चित करें और उल्लंघन होने पर तुरंत पुलिस या आबकारी विभाग को सूचना दें। जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम और उनकी टीम की सक्रियता, ईमानदार कार्यशैली और मजबूत प्रवर्तन नीति ने गाजियाबाद को प्रदेश में आबकारी प्रबंधन का सफल मॉडल बना दिया है। विभाग की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि सख्त प्रशासनिक व्यवस्था, पारदर्शिता और टीम भावना के माध्यम से राजस्व वृद्धि के साथ-साथ जनहित और सुरक्षा दोनों को संतुलित किया जा सकता है।

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