तस्करों की हर चाल फेल, आबकारी विभाग की निगरानी बनी सबसे बड़ी ढाल- निगरानी तंत्र से पहले ही पकड़ में आई तस्करी की योजना- लाखों की कार सीज, हजारों की शराब बरामद

एनसीआर। ‘जहां तेरी ये नजर है, मेरी जाँ मुझे खबर है…’ फिल्म कालिया का यह मशहूर गीत इन दिनों गौतमबुद्ध नगर के आबकारी विभाग की कार्यशैली पर पूरी तरह सटीक बैठता नजर आ रहा है। जिले में बाहरी राज्यों से शराब तस्करी करने वाले तस्करों और माफियाओं के लिए आबकारी विभाग की सक्रियता अब सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। विभाग की लगातार सख्ती और निगरानी के कारण कई पुराने तस्कर पहले ही तस्करी से तौबा कर चुके थे, लेकिन विभाग की पैनी नजर आज भी उन पर लगातार बनी हुई है।
दरअसल, आबकारी विभाग केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जिन तस्करों को पहले जेल भेजा जा चुका है उनकी पूरी कुंडली विभाग के पास सुरक्षित रहती है। विभाग की विशेष निगरानी प्रणाली के तहत ऐसे सभी लोगों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाती है। यही वजह है कि जैसे ही कोई तस्कर फिर से सक्रिय होने की कोशिश करता है, उसकी भनक आबकारी टीम को तुरंत लग जाती है। दो दिन बाद जिले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासनिक अमला तैयारियों में व्यस्त है। इसी बीच शराब तस्करों ने यह अनुमान लगाया कि प्रशासनिक व्यस्तता का फायदा उठाकर बाहरी राज्य हरियाणा से अवैध शराब की खेप आसानी से लाई जा सकती है। तस्करों ने योजना बनाकर जिले से बाहर जाकर शराब तो भर ली, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि आबकारी विभाग पहले से ही उनकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए है। जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव की रणनीति और सतर्क कार्यशैली के चलते टीम पहले से अलर्ट मोड में थी। गुरुवार को आबकारी निरीक्षक आशीष पाण्डेय के नेतृत्व में टीम ने मुखबिर की सूचना पर थाना जारचा पुलिस के साथ संयुक्त चेकिंग अभियान चलाया। कलौंदा स्थित श्मशान घाट के पास संदिग्ध वाहनों की जांच के दौरान एक अल्टो कार को रोकने का प्रयास किया गया। टीम को देखते ही कार सवार तस्करों ने भागने की कोशिश की, लेकिन आबकारी और पुलिस टीम ने तुरंत घेराबंदी कर वाहन को पकड़ लिया। जब कार की तलाशी ली गई तो डिग्गी से हरियाणा मार्का 75 बोतल ‘लाइट ब्लू मेट्रो लिक्विरÓ अंग्रेजी शराब बरामद हुई। बरामद शराब की अनुमानित कीमत करीब 80 हजार रुपये आंकी गई है, जबकि तस्करी में प्रयुक्त कार की कीमत पांच से छह लाख रुपये के बीच बताई जा रही है।
मौके से दो आरोपियों चंद्रपाल पुत्र प्रसादी और जितेंद्र पुत्र ओमवीर, निवासी चौना गांव, जारचा क्षेत्र को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी पहले भी शराब तस्करी के मामलों में जेल जा चुके हैं और लंबे समय से विभाग की निगरानी सूची में शामिल थे। आरोपी हरियाणा से शराब लाकर अपने गांव और आसपास होने वाले कार्यक्रमों में रात के समय ऊंचे दामों पर अवैध बिक्री करते थे। आबकारी विभाग की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि विभाग केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं बल्कि योजनाबद्ध रणनीति के तहत काम कर रहा है। जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव की कार्यशैली को लेकर विभाग में स्पष्ट संदेश है-तस्करी करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उनकी रणनीति में खुफिया सूचना तंत्र, पुराने अपराधियों की निगरानी, संयुक्त चेकिंग अभियान और त्वरित कार्रवाई प्रमुख हथियार बन चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार, जिले में शराब तस्करी की कम होती घटनाओं के पीछे आबकारी विभाग की निरंतर सक्रियता और टीमवर्क सबसे बड़ा कारण है। विभाग की टीमें दिन-रात विभिन्न क्षेत्रों में चेकिंग कर रही हैं और सीमावर्ती इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है। यही वजह है कि तस्कर अब नए तरीके अपनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन विभाग की सतर्क निगरानी उन्हें बार-बार पकड़वा रही है। आबकारी निरीक्षक आशीष पाण्डेय और उनकी टीम की तत्परता भी इस कार्रवाई में साफ दिखाई दी। सूचना मिलते ही टीम ने बिना समय गंवाए संयुक्त अभियान चलाया और तस्करों को मौके पर ही दबोच लिया। अधिकारियों का कहना है कि विभाग का उद्देश्य केवल शराब पकडऩा नहीं बल्कि तस्करी के पूरे नेटवर्क को खत्म करना है। जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अवैध शराब तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। बाहरी राज्यों से शराब लाकर अवैध बिक्री करने वालों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पकड़े गए दोनों आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया गया है तथा तस्करी में प्रयुक्त वाहन को भी सीज कर दिया गया है। प्रधानमंत्री के दौरे से पहले हुई इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि गौतमबुद्ध नगर में कानून व्यवस्था और अवैध गतिविधियों पर प्रशासन की पकड़ पूरी तरह मजबूत है। आबकारी विभाग की सतर्क नजर और मजबूत रणनीति के चलते अब तस्करों के लिए जिले में अवैध शराब कारोबार करना लगभग नामुमकिन होता जा रहा है।



