देशभर में इफको का नैनो उर्वरक महा अभियान शुरू, किसानों को मिलेगा आधुनिक खेती का साथ

19 राज्यों के 560 जिलों तक पहुंचेगा अभियान, नैनो तकनीक से खेती में बदलाव का लक्ष्य
कम लागत, अधिक उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
नई दिल्ली/ संतकबीरनगर
इफको ने देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की औपचारिक शुरुआत की। इस अभियान का शुभारंभ इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने नई दिल्ली से पांच नैनो प्रचार रथों को हरी झंडी दिखाकर किया।
इस अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता में श्री संघाणी ने बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों तथा 3,477 तहसीलों में चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों के बीच नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देना और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूकता फैलाना है।
उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की प्रेरणा से शुरू की गई है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘सहकार से समृद्धि’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों के अनुरूप है।
इफको के अनुसार, नैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में शामिल किया जाना कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह कदम देश में उर्वरक उपयोग की दिशा बदलने में सहायक साबित होगा।
यह अभियान प्रिंट, टेलीविजन, रेडियो, आउटडोर और डिजिटल मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों के जरिए चलाया जाएगा। साथ ही किसानों को नैनो उर्वरकों के सही उपयोग, विशेषकर फोलियर स्प्रे तकनीक, के बारे में प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
श्री संघाणी ने बताया कि इफको न केवल देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नैनो तकनीक में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है। कोयंबटूर स्थित इनोवेशन हब और ब्राजील में प्रस्तावित नैनो उर्वरक संयंत्र इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
उन्होंने नैनो उर्वरकों को खेती के लिए “परिवर्तनकारी तकनीक” बताते हुए कहा कि इससे पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी, लागत घटेगी और उत्पादन में वृद्धि होगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
अभियान के तहत नैनो यूरिया प्लस, नैनो DAP, नैनो NPK, नैनो जिंक और नैनो कॉपर जैसे उत्पादों का व्यापक प्रचार किया जाएगा। इफको के अनुसार, इन उत्पादों की बिक्री में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे किसानों का भरोसा बढ़ रहा है।
कार्यक्रम के अंत में श्री संघाणी ने इसे जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि नैनो उर्वरक केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम है।



