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सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, हापुड़ में दुर्लभ “द्विपक्षीय ब्रांचियल फिस्टुला” का सफल ऑपरेशन चार वर्षीय बच्ची को मिली नई ज़िंदगी

हरेंद्र शर्मा
हापुड़ जनपद के पिलखुवा के गांव अनवरपुर में सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, हापुड़ के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए चार वर्षीय बच्ची मानवी का अत्यंत दुर्लभ एवं जटिल जन्मजात रोग “द्विपक्षीय ब्रांचियल फिस्टुला” का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया है। यह सर्जरी अपनी जटिलता और अत्यंत कम मामलों में पाए जाने के कारण चिकित्सा जगत में “अत्यंत दुर्लभ” श्रेणी में मानी जाती है।
द्विपक्षीय ब्रांचियल फिस्टुला एक जन्मजात विकार है, जिसमें गर्दन के दोनों ओर असामान्य नलिकाएँ विकसित हो जाती हैं। ये नलिकाएँ त्वचा और आंतरिक संरचनाओं के बीच असामान्य संपर्क स्थापित करती हैं, जिसके कारण रोगी को बार-बार संक्रमण, द्रव या पस का स्राव तथा सूजन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यदि इस बीमारी का समय रहते उचित उपचार न किया जाए, तो यह आगे चलकर गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है और रोगी के सामान्य जीवन को प्रभावित कर सकती है।
इस प्रकार के जटिल मामलों में सटीक एवं समय पर निदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। साथ ही, सर्जरी के दौरान फिस्टुला पथ की पूर्ण पहचान और उसका सम्पूर्ण निष्कासन करना अनिवार्य होता है, क्योंकि यदि कोई भी हिस्सा शेष रह जाए तो भविष्य में रोग के पुनः उत्पन्न होने की संभावना बनी रहती है। यही कारण है कि इस तरह की सर्जरी को अत्यधिक कौशल, अनुभव और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की आवश्यकता होती है।सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SIMS), हापुड़ के कर्ण, नासिका एवं कंठ विभाग की अनुभवी सर्जिकल टीम ने इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को अत्यंत सावधानी, सटीकता और कुशलता के साथ सफलतापूर्वक संपन्न किया। ऑपरेशन के दौरान बच्ची के गर्दन के दोनों ओर स्थित फिस्टुला पथ का पूर्ण निष्कासन किया गया, जिससे भविष्य में पुनरावृत्ति की संभावना समाप्त हो सके। सर्जरी के पश्चात बच्ची की स्थिति स्थिर है और वह चिकित्सकीय देखरेख में तेजी से स्वस्थ हो रही है। चिकित्सकों के अनुसार, समय पर उपचार मिलने के कारण बच्ची अब सामान्य जीवन की ओर अग्रसर है।इस सफल सर्जरी में सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, हापुड़ के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें विभागाध्यक्ष डॉ. अविनाश कुमार के नेतृत्व में डॉ. शुभम मित्तल, डॉ. नंदिनी तथा डॉ. थजाना शामिल रहे। सभी चिकित्सकों के समन्वित प्रयास और टीम वर्क ने इस जटिल ऑपरेशन को सफलता तक पहुँचाने में अहम योगदान दिया।
यह उपलब्धि सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, हापुड़ में उपलब्ध अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, आधुनिक ऑपरेशन थिएटर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की दक्षता का प्रमाण है। संस्थान निरंतर जटिल से जटिल बीमारियों के सफल उपचार के लिए प्रतिबद्ध है और क्षेत्र के लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान कर रहा है।
इस उल्लेखनीय उपलब्धि की संस्थान के प्रबंधन द्वारा भी व्यापक सराहना की गई। संस्थान की प्राचार्या डॉ. बरखा गुप्ता,वरिष्ठ सलाहकार ब्रिगेडियर डॉ. आर. के. सहगल, महाप्रबंधक एन. वर्धराजन, निदेशक रघुवर दत्त तथा चिकित्सा अधीक्षक मेजर जनरल डॉ. सी. एस. आहलूवालिया ने ईएनटी विभाग की पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने टीम की समर्पण भावना, उत्कृष्ट चिकित्सीय कौशल तथा क्षेत्र में उन्नत और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की प्रतिबद्धता की सराहना की।इसके अतिरिक्त, सरस्वती समूह संस्थानों के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. जे. रामचंद्रन तथा उपाध्यक्ष रम्या रामचंद्रन ने भी पूरी टीम को इस सफलता के लिए बधाई दी और उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की उपलब्धियां संस्थान की उत्कृष्टता, नवाचार तथा रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं और भविष्य में भी ऐसे ही उच्च मानकों को बनाए रखने की प्रेरणा प्रदान करती हैं।
साथ ही, चिकित्सकों ने जनसामान्य को यह संदेश भी दिया है कि बच्चों में यदि गर्दन पर असामान्य सूजन, बार-बार संक्रमण या किसी प्रकार का स्राव दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें। समय पर पहचान और उचित उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SIMS), हापुड़ अपने उच्च चिकित्सा मानकों, अनुभवी चिकित्सकों और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्टता की दिशा में कार्य कर रहा है और भविष्य में भी इसी प्रकार समाज को बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान करने के लिए संकल्पित है।

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