प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से गर्भवती महिलाओं को मिल रही आर्थिक संबल-पहले बच्चे पर पाँच हजार, दूसरी बेटी पर छह हजार की सहायता

गाजियाबाद। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार तथा सुरक्षित और स्वस्थ मातृत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह योजना महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान बेहतर पोषण और देखभाल के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करती है, जिससे माँ और शिशु दोनों का स्वास्थ्य सुदृढ़ हो सके।
योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए महिला की आयु 18 वर्ष 7 माह से 55 वर्ष के बीच होना आवश्यक है। पहले बच्चे के लिए, चाहे पुत्र हो या पुत्री, कुल पाँच हजार रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। पहली किस्त तीन हजार रुपये तब दी जाती है जब गर्भवती महिला की प्रसव पूर्व जांच पूरी हो जाए, टिटनेस का पहला टीकाकरण हो चुका हो तथा मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड पर माता-शिशु निगरानी क्रमांक अंकित हो। दूसरी किस्त दो हजार रुपये शिशु के जन्म और 14 सप्ताह पर पेंटा का तीसरा टीकाकरण पूर्ण होने के पश्चात दी जाती है। यदि दूसरे बच्चे के रूप में बेटी का जन्म होता है तो छह हजार रुपये की एकमुश्त सहायता प्रदान की जाती है। इसके लिए भी शिशु के जन्म के बाद 14 सप्ताह पर पेंटा का तीसरा टीकाकरण पूर्ण होना आवश्यक है।
योजना का लाभ लेने हेतु माँ का आधार कार्ड, मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड पर प्रसव पूर्व जांच की तिथि तथा निगरानी क्रमांक अंकित होना अनिवार्य है। साथ ही पोषण ट्रैकर अनुप्रयोग पर पंजीकरण कराना भी आवश्यक है। शिशु का जन्म प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत करना होगा। पात्रता के लिए परिवार की वार्षिक आय आठ लाख रुपये से कम होनी चाहिए, जिसके प्रमाण के रूप में आय प्रमाणपत्र, बीपीएल राशन कार्ड, ई-श्रम कार्ड, आयुष्मान कार्ड या मनरेगा सूची में नाम स्वीकार्य है। महिला किसान होने की स्थिति में किसान सम्मान निधि की लाभार्थी होना आवश्यक है। यदि महिला दिव्यांग है और 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता है तो दिव्यांगता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा। अनुसूचित जाति या जनजाति से संबंधित होने पर जाति प्रमाणपत्र आवश्यक है। आधार कार्ड का बैंक खाते से जुड़ा होना, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली के माध्यम से भुगतान तथा राष्ट्रीय भुगतान निगम के अंतर्गत खाता सक्रिय होना जरूरी है। आवेदन गर्भवती महिला के अंतिम मासिक चक्र से 570 दिनों के भीतर अथवा शिशु के जन्म से 270 दिनों के भीतर किया जा सकता है। सरकारी कर्मचारी इस योजना के पात्र नहीं हैं। स्वास्थ्य एवं महिला कल्याण विभाग ने पात्र महिलाओं से अपील की है कि वे योजना का लाभ लेने के लिए अपने नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र पर संपर्क कर समय से पंजीकरण कराएं, ताकि सुरक्षित मातृत्व की दिशा में यह पहल अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंच सके।



