होली की धूम, आज 250 स्थानों पर होगा होलिका दहन-चंद्र ग्रहण के कारण तिथियों में बदलाव, धुलंडी चार मार्च को
गाजियाबाद। होली का उत्साह अब शहर की फिजाओं में घुलने लगा है। बाजारों में गुलाल, पिचकारी और रंगों की खरीदारी जोरों पर है, वहीं मंदिरों, आवासीय सोसायटियों और प्रमुख चौराहों पर होलिका दहन की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर शहर में सोमवार को करीब 250 स्थानों पर होलिका दहन की व्यवस्था की गई है। इस बार चंद्र ग्रहण के कारण पर्व की तिथियों में आंशिक बदलाव किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तीन मार्च को सुबह साढ़े छह बजे से चंद्र ग्रहण का सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा। सूतक काल में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं और रंग-गुलाल खेलना भी उचित नहीं समझा जाता। ऐसे में सोमवार को केवल होलिका दहन का आयोजन किया जाएगा, जबकि रंगों की होली यानी धुलंडी चार मार्च को मनाई जाएगी।
ग्रहण समाप्ति के बाद श्रद्धालु स्नान-ध्यान कर शुद्धिकरण करेंगे और अगले दिन रंगोत्सव का आनंद उठाएंगे। पंडितों का कहना है कि सूतक काल में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य से परहेज करना चाहिए और धार्मिक आस्था के अनुसार ही पर्व मनाना श्रेयस्कर है। शहर के विभिन्न इलाकों में होलिका दहन के लिए लकडिय़ों और उपलों के ऊंचे-ऊंचे ढेर सजाए गए हैं। कई स्थानों पर होलिका को अबीर-गुलाल और रंग-बिरंगे कागजों से आकर्षक रूप दिया गया है। बच्चों और युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
इस बार कई सोसायटियों और सामाजिक संगठनों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया है। कुछ स्थानों पर केवल गोबर के उपलों और सूखी लकडिय़ों का उपयोग कर होलिका तैयार की गई है, ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे। आयोजकों का कहना है कि पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ प्रकृति की सुरक्षा का ध्यान रखना भी आवश्यक है। शहर में सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन भी सतर्क है। प्रमुख चौराहों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में निगरानी की व्यवस्था की गई है। कुल मिलाकर गाजियाबाद में इस बार होली का उत्सव आस्था, परंपरा और पर्यावरण जागरूकता के संदेश के साथ मनाया जाएगा।



