ग़ाज़ियाबाद

पश्चिम एशिया युद्ध की मार: में गाजियाबाद की 195 सड़कों का निर्माण संकट

-महंगा और दुर्लभ हुआ बिटुमेन, ठेकेदार टेंडर लौटाने लगे

गाजियाबाद। सड़क निर्माण परियोजनाओं पर पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का सीधा असर देखने को मिल रहा है। युद्ध के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों में आए भारी बदलाव ने सड़क निर्माण की प्रमुख सामग्री तारकोल (बिटुमेन) को महंगा और दुर्लभ बना दिया है। इसका परिणाम यह हुआ है कि नगर निगम और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की कुल 195 सड़कों के निर्माण कार्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। नगर निगम की 85 और पीडब्ल्यूडी की 110 सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है। नगर निगम द्वारा लगभग 112 किलोमीटर लंबाई की सड़कों को गड्ढामुक्त करने, चौड़ीकरण और पुनर्निर्माण के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं। हालांकि, युद्ध शुरू होने के बाद स्थिति अचानक बदल गई और अब ठेकेदार निर्माण कार्य आगे बढ़ाने में असमर्थता जता रहे हैं।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार कई ठेकेदारों ने विभाग से टेंडर वापस लेने की गुहार लगाई है। ठेकेदारों का कहना है कि बिटुमेन न केवल अत्यधिक महंगा हो गया है बल्कि इसकी उपलब्धता भी बेहद सीमित हो गई है। ऐसे में पुराने दरों पर लिए गए ठेकों में काम करना आर्थिक रूप से संभव नहीं रह गया है। नई निविदाओं में भी ठेकेदार रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
तकनीकी आंकड़ों के अनुसार एक वर्ग मीटर सड़क निर्माण में लगभग 2.41 किलोग्राम तारकोल की आवश्यकता होती है। ग्रामीण क्षेत्र में तीन मीटर चौड़ी और एक किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण में करीब 7.25 टन तारकोल लगता है। वहीं 5.5 मीटर चौड़ी सड़क में लगभग 15 टन और सात मीटर चौड़ी सड़क के लिए करीब 19 टन तारकोल की जरूरत होती है। ऐसे में कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी कुल परियोजना लागत को कई गुना बढ़ा देती है। फरवरी माह में युद्ध शुरू होने से पहले बिटुमेन की कीमत लगभग 46,800 रुपये प्रति मीट्रिक टन थी। युद्ध के एक सप्ताह के भीतर कीमत बढ़कर लगभग 49 हजार रुपये प्रति टन हो गई। हाल ही में रिफाइनरियों द्वारा फिर से कीमतों में बढ़ोतरी किए जाने के बाद शनिवार को तारकोल की कीमत स्थान के अनुसार 58,890 से 66,300 रुपये प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। इस तेजी ने निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों दोनों की आर्थिक गणना बिगाड़ दी है। पीडब्ल्यूडी द्वारा लगभग 215 किलोमीटर लंबाई की 110 सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है, जिस पर करीब 197.5 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि लागत बढऩे और सामग्री की कमी के कारण कार्य की गति प्रभावित हो सकती है। हालांकि विभाग समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने का प्रयास कर रहा है। पीडब्ल्यूडी ने सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले इमल्शन की कीमतों को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। इमल्शन का उत्पादन खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे तेल पर निर्भर करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का सीधा प्रभाव इस सामग्री पर भी पड़ रहा है। जिन 195 सड़कों पर निर्माण कार्य प्रस्तावित है, उनमें नगर निगम की 26 और पीडब्ल्यूडी की 20 सड़कें अत्यंत जर्जर स्थिति में हैं। इन सड़कों से प्रतिदिन लाखों वाहन गुजरते हैं और लंबे समय से स्थानीय नागरिक इनके निर्माण की मांग कर रहे हैं। यदि जल्द ही तारकोल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती है तो सड़क निर्माण कार्य में और देरी होने की आशंका बढ़ जाएगी, जिससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता रामराजा ने बताया कि पश्चिम एशिया युद्ध के कारण तारकोल महंगा हो गया है, जिसका असर सड़क निर्माण परियोजनाओं पर पडऩा तय है। उन्होंने कहा कि निर्माण लागत बढऩे की संभावना है और विभाग परिस्थितियों के अनुसार रणनीति बनाकर कार्य को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय हालातों का स्थानीय विकास परियोजनाओं पर पड़ रहा यह प्रभाव अब साफ दिखाई देने लगा है। सड़क निर्माण में संभावित देरी से जहां प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ेंगी, वहीं शहरवासियों को बेहतर सड़कों के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।

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