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गैस की किल्लत को लेकर उपभोक्ता काटते दिखे हंगामा, कालाबाजारी के लगाये आरोप

  • क्षेत्रों में दिखी गैस की किल्लत,1600 से 2000 तक बिक रहा कालाबाजारी में सिलेण्डर।

वेलकम इण्डिया/
असदुल्लाह सिद्दीकी

सिद्धार्थनगर।उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर शहर सहित जनपद के तहसीलों मे गैस सिलेण्डर की किल्लत को लेकर उपभोक्ता काफी परेशान हैं। आपको बताते चले कि पहले तो उपभोक्ताओं को सिलेण्डर बुक करने भी भारी दिक्कत का सामना करना पड रहा है, क्योंकि ज्यादातर गैस एजेंसियों के बुकिंग नम्बर बन्द पडे हुए है और अगर जैसे- तैसे गैस बुक हो भी जा रही है तो सिलेण्डर बुक करने पर डीएसी कोड आने के बाद भी उपभोक्ताओं को सिलेण्डर नहीं मिल पा रहे है, जिसको लेकर आये दिन गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की भारी भीड जमा हो रही है। इस दौरान उपभोक्ताओं ने गैस एजेंसियों पर कालाबाजारी के भी आरोप लगायें हैं। उपभोक्ताओं ने बताया कि जो सिलेण्डर बुक होने पर 985 रूपये के लगभग मिल रहा है। तो वही कालाबाजारी में वह सिलेण्डर को 1600 से 20000 रूपये तक बेचा जा रहा है। उपभोक्ताओं ने कहा कि 342 सिलेण्डर एजेंसी पर आने के बाद भी लोगो को 250 से 300 सिलेण्डर ही दिये जा रहे है। बाकी लगभग 50 सिलेण्डर एजेंसी मालिकों एवं कर्मचारियों द्वारा कालाबाजारी कर दिया जा रहा है। वहीं जागरूक उपभोक्ता ने शासन व प्रशासन से एजेंसी मालिकों पर आरोप लगाया कि जब उपभोक्ताओं का केवाईसी नहीं करा पायें और सिलेण्डर नहीं बुक हो रहा है तो आखिर उपभोक्ताओं का सिलेण्डर डिलेवर्ड क्यों दिखाया जाता है। जबकि उपभोक्ता द्वारा एजेंसी पर कहासुनी होती है तो एजेंसी वालें कहते हैं कि उपभोक्ता की आईडी पर डिलेवरी दिख रहा है, हम गैस नहीं दे सकते। इसका मतलब यह हुआ कि जब उपभोक्ता केवाईसी के अभाव में में गैस नहीं ले सकता तो एजेंसी मालिक एवं कर्मचारियों द्वारा उपभोक्ताओं का गैस लोड आने पर लगभग 50 सिलेण्डर कालाबाजारी कर रहें हैं। वहीं उपभोक्ताओं ने यह भी कहा कि सिलेण्डर डीएसी कोड आने के बाद भी उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र में गैस की गाड़ी तो आ रही है और गैस वितरण कर रहे हैं और कर्मचारी दाहिने-बायें हाथ सिलेण्डर कालाबाजारी करा रहे हैं और अगर उपभोक्ता एजेंसी पर जा रहा है तो उसे यह कहकर “तुम्हारा गैस उपभोक्ता आईडी पर डिलेवरी दिखा रहा है, हम गैस नहीं दे पायेंगे” खाली हाथों लौटना पड रहा है। वहीं यह सवाल भी उठता है कि जब उपभोक्ता सिलेण्डर डीएसी कोड फोन द्वारा मंगाता है तो एक उपभोक्ता पर जाता है और दूसरा गैस एजेंसियों पर। जब उपभोक्ता सिलेण्डर डीएसी कोड देकर गैस पाता है तो आखिर गैस कालाबाजारी करता है कौन? कुछ उपभोक्ताओं ने एजेंसी मे गैस वितरण के कार्य में लगे कर्मचारियों पर सिलेण्डर 1600 से 2000 रुपए तक ब्लैक में बेचने के भी आरोप लगाए हैं। इस मामले मे आपूर्ति निरीक्षक शोहरतगढ़़ सहित जिलापूर्ति अधिकारी ने गैस सिलेण्डर ब्लैक में बेचे जाने के आरोप को गम्भीरता से लेते हुए कहा है कि इसकी जांच कराई जायेगी, इसमें जो भी दोषी पाया गया उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी। अब देखना है कि एजेंसी पर कुछ कार्यवाही भी अमल में लायी जायेगी या अधिकारियों द्वारा बस खानापूर्ति कर उपभोक्ताओं को गुमराह किया जायेगा।

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