शहर-राज्य

फसल बीमा योजना एवं धरती माता बचाओ समिति की बैठक हुई संपन्न, जिलाधिकारी ने की अध्यक्षता

मथुरा। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में फसल बीमा योजना एवं धरती माता बचाओ समिति की बैठक हुई संपन्न। जिला कृषि अधिकारी ने बैठक में अवगत कराया कि भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय, उर्वरक विभाग के द्वारा उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग को नियंत्रित करने तथा औद्योगिक इकाइयों में अवैध परिसंचलन, कालाबाजारी, ओवर रेटिंग एवं तस्करी को रोकने के साथ ही मृदा स्वास्थ्य में अनुकूल परिवर्तन लाने के उद्देश्य से धरती माता बचाओ अभियान की शुरूआत की जानी है, जिसके अन्तर्गत त्रिस्तरीय समिति (धरती माता बचाओं समिति) का गठन किया जाने के निर्देश दिये गये हैं, जो कि ग्राम, तहसील एवं जिला स्तर पर क्रियान्वित होगी। उक्त के दृष्टिगत जनपद स्तरीय से धरती माता बचाओ अभियान के अन्तर्गत जिला स्तरीय धरती माता बचाओ समिति की बैठक आयोजित की गई है।

            जिला कृषि अधिकारी द्वारा बताया गया कि जनपद में विगत 3 वर्षों में यूरिया, डीएपी एनपीके एवं मओपीव की खपत हुई है। जनपद स्तरीय, तहसील स्तरीय एवं विकास खण्ड स्तरीय कृषि गोष्ठियों / कृषि मेलों के माध्यम से कृषकों को मृदा परीक्षण के आधार पर फसलों में उर्वरकों का प्रयोग करने हेतु प्रेरित किया गया है, जिसका परिणाम स्वरूप विगत वर्षों की तुलना में वर्तमान वर्ष 2025-26 में रासायनिक उर्वरकों की खपत कम हुई है।

          जिला कृषि अधिकारी द्वारा समिति के समस्त सदस्यों को अवगत कराया गया कि जनपद स्तरीय समीक्षा एवं निगरानी समिति के विभिन्न दायित्व हैं, जिसमें जनपद में उर्वरक उपयोग की समीक्षा करना और उर्वरक के संतुलित उपयोग के लिए विषेश अभियान चलाना। जिला प्रशासन कम से कम 100 ग्राम पंचायतों की पहचान करेगा, जहां अतीत में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग अधिक हुआ है। इन गांवो में और अधिक ठोस प्रयास किये जायेंगेे और कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक अनिवार्य रूप से इन गांवो का दौरा करेंगें और ग्राम पंचायत की बैठकों में भाग लेगे। उर्वरक के अवैध उपयोग पर कड़ी निगरानी रखी जानी चाहिए तथा इसके दोषी पाये गये डीलर के विरुद्ध एफआईआर और गिरफ्तारी, डीलरशिप के लाइसेंस का निलम्बन आदि जैसे प्रभावी प्रवर्तन कार्यवाही की जानी चाहिए। समिति पूर्व में की गयी प्रवर्तन कार्यवाही की भी समीक्षा करेंगी। जिला स्तरीय समीक्षा निगरानी समिति उर्वरक के स्टाॅक की स्थिति की समीक्षा करेगी और जिले के भीतर कमी वाले क्षेत्रों में किसी भी अधिशेष उर्वरक को पुनः आवंटित करने की सिफारिस करेगी।

            बैठक में जिलाधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया कि जिन ग्राम पंचायतों में रासायनिक उर्वरक अधिक प्रयोग किया गया है, ऐसी 100 ग्राम पंचायत की सूची निकालकर उन ग्राम पंचायतों में अभियान चलाकर कृषकों को मृदा परीक्षण के आधार पर रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करने हेतु विभिन्न गोष्ठियों / मेलो के माध्यम से अवगत कराया जाए, ताकि कृषक संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग कर सके।

      जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि यूरिया उर्वरक के डाइवर्जन हेतु जनपद की सीमा पर स्थापित पुलिस चौकियों / थानों के माध्यम से बार्डर अनवरत चैकिंग अभियान चलाकर जनपद से अन्य प्रदेशों को उर्वरकों की तस्करी/डाइवर्जन पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए।

         जिलाधिकारी द्वारा कृषि ग्रेड यूरिया उर्वरक का प्रयोग इंडस्ट्रियल, फैक्ट्रीयों, उद्योगों, बीनियर, साड़ी रंगाई, डिस शॉप, पाॅली फील्ड आदि अन्य उद्योगों में संभावित डाइवर्जन की निगरानी करने हेतु जिला स्तर से टीम गठित कर चैकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिये गये, ताकि कृषि ग्रेड यूरिया के प्रयोग को इंडस्ट्रियल, फैक्ट्रीयों, अन्य उद्योगों में न हो।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button