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उज्ज्वला का ‘अंधेरा’: सिद्धार्थनगर में रात 2 बजे से गैस के लिए कतारों में खड़ी महिलाएं, सिस्टम लाचार

असदुल्लाह सिद्दीकी

इटवा(सिद्धार्थनगर)। सरकार की जिस ‘उज्ज्वला योजना’ को महिलाओं के सम्मान और धुएं से मुक्ति का प्रतीक बताया गया था, वह आज तहसील इटवा के उपभोक्ताओं के लिए दुस्वप्न बन गई है। इटवा अंतर्गत कठेला गर्वी स्थित गैस एजेंसी पर अव्यवस्था का आलम यह है कि कड़ाके की ठंड और असुरक्षा के बीच महिलाएं रात 2:00 बजे से ही अपने खाली सिलेंडरों के साथ लाइन लगाने को मजबूर हैं।

बुकिंग के 15 दिन बाद भी खाली हाथ उपभोक्ता

गौरीडीह निवासी राम शंकर सहित दर्जनों उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस सिलेंडर बुक किए हुए 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन आपूर्ति का नामोनिशान नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि जब गैस की गाड़ी आती है, तो महज 50-60 लोगों को सिलेंडर देकर ‘स्टॉक खत्म’ होने का हवाला दे दिया जाता है। पिछले दो हफ्तों से लोग रोज सिलेंडर लेकर आते हैं और खाली हाथ वापस लौट जाते हैं।

मजबूरी में रात भर जाग रही हैं महिलाएं

लाइन में खड़ी दर्जनों महिलाओं का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने बताया कि उनके पति रोजी-रोटी के लिए मुंबई, पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में हैं। घर की जिम्मेदारी संभाल रही इन महिलाओं को अब रात-रात भर गैस के लिए सड़कों पर पहरा देना पड़ रहा है। महिलाओं ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा सरकार ने हमें गैस का आदी तो बना दिया, लेकिन अब यह उज्ज्वला योजना नहीं, बल्कि ‘रात भर लाइन में लगने की योजना’ बन गई है।

प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत में भारी अंतर

एक ओर जिलाधिकारी सोशल मीडिया के माध्यम से जिले में गैस की पर्याप्त उपलब्धता का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कठेला गर्वी की स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि यहाँ खुलेआम कालाबाजारी हो रही है। स्थानीय पुलिस पर भी आरोप है कि वे जनता की समस्या सुनने के बजाय एजेंसी मालिकों के पक्ष में ‘पुलीसिया रोब’ दिखा रहे हैं, जिससे आए दिन झड़प की स्थिति बनी रहती है।

चक्का जाम की चेतावनी

त्रस्त उपभोक्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आज उन्हें गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया गया, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन और चक्का जाम करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और गैस एजेंसी की होगी।

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