मोबाइल हैक कर 3 करोड़ की ठगी का पर्दाफाश, साइबर थाना पुलिस ने तीन शातिर किए गिरफ्तार-12 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, 8 सिम कार्ड और एक कार बरामद, फरार साथियों की तलाश जारी

गाजियाबाद। थाना साइबर अपराध, पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद ने एपीके फाइल के माध्यम से मोबाइल फोन हैक कर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने झारखंड और बिहार से जुड़े तीन शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह व्हाट्सएप के जरिए फर्जी फाइल भेजकर लोगों के मोबाइल का नियंत्रण प्राप्त कर उनके बैंक खातों से धनराशि पार कर देता था। जांच में सामने आया है कि गिरोह ने 16 राज्यों में करीब तीन करोड़ रुपये की 94 घटनाओं को अंजाम दिया है। पुलिस उपायुक्त नगर/मुख्यालय धवल जायसवाल ने बताया कि मोदीनगर निवासी डॉ. श्रवण कुमार शर्मा के साथ गंभीर साइबर ठगी की घटना हुई थी। उनके मोबाइल पर व्हाट्सएप के माध्यम से ‘आरटीओ ई-चालान नामक एपीके फाइल भेजी गई थी। फाइल डाउनलोड करते ही उनका मोबाइल हैक हो गया और 10 फरवरी 2026 से 19 फरवरी 2026 के बीच उनके बैंक खातों से 31 लाख 81 हजार 706 रुपये आरोपियों ने अपने खातों में स्थानांतरित कर लिए। इस संबंध में थाना साइबर अपराध में मुकदमा दर्ज कर जांच प्रारंभ की गई। जांच के दौरान साइबर टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के तीन सदस्यों पिन्टू कुमार, आदर्श कुमार और प्रशांत दीप को थाना विजय नगर क्षेत्र से गिरफ्तार किया। पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया कि आदर्श कुमार ने झारखंड निवासी अपने साथी अभिषेक कुमार से मोबाइल हैक कर ठगी करने का प्रशिक्षण लिया था। अभिषेक विभिन्न प्रकार की फर्जी एपीके फाइलें उपलब्ध कराता था, जिनका उपयोग कर ये लोग लोगों के मोबाइल में सेंध लगाते थे। अभियुक्तों ने बताया कि वे गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध ‘गर्ल फ्रेंड नंबर नामक अनुप्रयोग के माध्यम से हजारों मोबाइल नंबर प्राप्त करते थे। इसके बाद व्हाट्सएप के जरिए उन नंबरों पर फर्जी एपीके फाइल भेजी जाती थी। सिम कार्ड की व्यवस्था के लिए वे अपने साथी पंकज कुमार यादव निवासी जमुई, बिहार से 700 से 1200 रुपये प्रति सिम के हिसाब से सिम कार्ड खरीदते थे। एपीके फाइलें एक टेलीग्राम पहचान के माध्यम से खरीदी जाती थीं। मोबाइल हैक होने के बाद पीडि़तों का डाटा ‘साहिल नामक व्यक्ति को भेजा जाता था। वह मोबाइल बैंकिंग का नियंत्रण प्राप्त कर पीडि़तों के बैंक खातों से धनराशि को पहले से तैयार किए गए खातों में स्थानांतरित कर देता था और फिर एटीएम से नकद निकालकर अपना हिस्सा रख शेष धनराशि गिरोह के सदस्यों तक पहुंचाता था। पुलिस अब अभिषेक, पंकज यादव और साहिल की तलाश कर रही है। बरामद डिजिटल साक्ष्यों से पता चला है कि गिरोह भीम बायपास, आरटीओ ट्रैफिक चालान, भीम 4.0.11, पेटीएम संस्करण-2, पीकेके बुक, इंडियन ओवरसीज बैंक, टाटा न्यू साइन और एम परिवहन नाम से मिलती-जुलती फर्जी फाइलों का उपयोग करता था। इन फाइलों के माध्यम से सैकड़ों लोगों को निशाना बनाया गया। जांच में आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल सहित 16 राज्यों की कुल 94 घटनाओं का विवरण सामने आया है। उत्तराखंड में सर्वाधिक 29 घटनाएं पाई गईं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 12 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, 8 सिम कार्ड और एक कार बरामद की है। पुलिस उपायुक्त धवल जायसवाल ने कहा कि साइबर अपराधों के विरुद्ध कमिश्नरेट पुलिस निरंतर अभियान चला रही है और तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता से ऐसे गिरोहों को चिह्नित कर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी अनजान लिंक या फाइल को डाउनलोड न करें तथा संदिग्ध संदेश मिलने पर तुरंत साइबर सहायता हेल्पलाइन पर सूचना दें। साइबर थाना पुलिस की इस कार्रवाई से स्पष्ट हो गया है कि डिजिटल ठगी करने वाले अपराधियों के लिए गाजियाबाद अब सुरक्षित ठिकाना नहीं रहा है।



