देशद्रोही जासूसी नेटवर्क का खुलासा, तीन और आरोपी गिरफ्तार-पाकिस्तान को सैन्य ठिकानों की जानकारी भेजने का आरोप

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पुलिस ने देश की सुरक्षा से जुड़े एक बड़े जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए मंगलवार को तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह सभी आरोपी पाकिस्तान के लिए संवेदनशील सैन्य ठिकानों, रेलवे स्टेशनों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की जानकारी साझा करने के आरोप में पकड़े गए हैं। इस कार्रवाई के बाद अब तक इस नेटवर्क से जुड़े कुल 21 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में बिहार के भागलपुर निवासी समीर उर्फ शूटर, शामली के बाबरी क्षेत्र के बुटराडा निवासी समीर और कौशांबी के भोवापुर निवासी शिवराज शामिल हैं। समीर उर्फ शूटर को इस नेटवर्क का भारत में सक्रिय प्रमुख सदस्य माना जा रहा है। पुलिस की विशेष जांच टीम की पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।
पूछताछ के दौरान समीर उर्फ शूटर ने बताया कि वर्ष 2024 में उसने सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ अपनी तस्वीरें और वीडियो साझा किए थे। इन्हीं के माध्यम से सुहेल मलिक उर्फ रोमियो और नौशाद अली ने उससे संपर्क किया। इसके बाद उसे विभिन्न व्हाट्सएप समूहों में जोड़ा गया, जहां से उसे देश के अलग-अलग सैन्य ठिकानों और रेलवे स्टेशनों की रेकी करने का काम सौंपा गया। वह विशेष मोबाइल एप के जरिए फोटो, वीडियो और जीपीएस लोकेशन पाकिस्तान में बैठे संचालकों को भेजता था, जिसके लिए उसे ऑनलाइन प्रशिक्षण भी दिया गया था। वहीं, शामली के आरोपी समीर ने बताया कि वह इंस्टाग्राम के जरिए नौशाद के संपर्क में आया था और बाद में इस नेटवर्क से जुड़ गया। उसने यह भी स्वीकार किया कि वह पहले से गिरफ्तार एक महिला आरोपी के साथ मिलकर मध्य प्रदेश से हथियार तस्करी के मामले में भी शामिल रहा है।
तीसरे आरोपी शिवराज ने खुलासा किया कि उसने पाकिस्तान में बैठे सरगना के निर्देश पर सोनीपत रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरा लगाया था। इन कैमरों की सीधी पहुंच पाकिस्तान में मौजूद व्यक्ति को दी गई थी। इसके बदले उसे पांच हजार रुपये की रकम दी गई थी। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस तरह के कितने और कैमरे संवेदनशील स्थानों पर लगाए गए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस नेटवर्क के तार देश के कई राज्यों से जुड़े हुए हैं। इससे पहले 14 मार्च को कौशांबी थाना पुलिस ने एक महिला समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनके मोबाइल फोन से सैन्य ठिकानों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के फोटो और वीडियो बरामद हुए थे। इसके बाद 20 मार्च को पांच नाबालिगों सहित नौ और 22 मार्च को महिला और नाबालिग समेत तीन अन्य आरोपियों को पकड़ा गया था। पुलिस उपायुक्त धवल जायसवाल ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं, जिनके आधार पर आगे की जांच तेजी से की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश के लिए विभिन्न एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ शासकीय गुप्त बात अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। साथ ही, जांच के आधार पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की धारा 18 भी जोड़ी गई है, जो आतंकवादी गतिविधियों की साजिश और सहयोग से संबंधित है। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क के आर्थिक लेनदेन, बैंक खातों और विदेशी संपर्कों की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के साथ ही इस जासूसी गिरोह के कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है, जो देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।



