सोनार समागम महापंचायत में उठी राजनीतिक भागीदारी की मांग
मथुरा। रविन्द्रालय में आयोजित ‘सोनार समागम महापंचायत’ एवं स्नेह मिलन समारोह में स्वर्णकार समाज ने राजनीतिक हिस्सेदारी और सामाजिक पहचान की मजबूत मांग उठाई। वक्ताओं ने कहा कि आजादी के 79 वर्ष बाद भी स्वर्णकार समाज को उसकी जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका है। देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने के बावजूद समाज केवल वोटर बनकर रह गया है।कार्यक्रम का शुभारंभ संत नरहरिदास जी महाराज और महाराजा अजमीढ़ जी के चित्रों पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन से हुआ। इसमें प्रदेश भर से आए स्वर्णकार संगठनों के प्रतिनिधियों और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े पदाधिकारियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने कहा कि बीएनएस की धाराओं की आड़ में स्वर्णकार समाज का पुलिसिया उत्पीड़न हो रहा है, जिसे रोकने और सोने-चांदी के व्यापार को सुरक्षित करने की आवश्यकता है। समारोह में यह भी चेतावनी दी गई कि यदि राजनीतिक दलों ने स्वर्णकार समाज को जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं दिया, तो समाज पंचायत से लेकर लोकसभा चुनाव तक अपने निर्णय स्वतंत्र रूप से लेने को बाध्य होगा।मध्य प्रदेश की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में स्वर्ण कला बोर्ड के गठन की मांग उठाई। साथ ही ज्वैलरी व्यवसायियों की सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस दिलाने हेतु प्रयास करने की बात कही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बीएल सोनी ने की और संचालन अधिवक्ता सुषमा सोनी व कुन्दनलाल वर्मा ने किया।
कार्यक्रम में मथुरा जनपद से अखिल भारतीय स्वर्णकार जनजागृति एसोसिएशन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी सुजीत वर्मा के नेतृत्व में सैकड़ों स्वजातीय बंधुओं ने भाग लिया।सुजीत वर्मा ने कहा कि स्वर्णकार समाज अपने अधिकारों के लिए अब जागरूक हो चुका है।



