शहर-राज्य

केरल में सामूहिक श्वानसंहार: गांव के 500 कुत्तों को जहर देकर मार डाला गया

देश में कुत्तों से प्रेम करने वाले और उनसे घृणा करने वाले  दो तरह के लोग हैं। कुत्ता प्रेमी लोग संवेदनशील और सेवाभावी होते हैं, जबकि कुत्तों से घृणा करने वाले उन्हें खत्म करने के लिए हाथ में लाठी लेकर निकल पड़ते हैं। कुत्तों से नफरत करने वाले लोग अक्सर बहुत बोलने वाले होते हैं और छोटी-छोटी बातों को बड़ा मुद्दा बना देते हैं। जब तक कुत्ता बिना किसी कीमत के घर की रखवाली करता है, तब तक वह प्यारा और वफादार लगता है, लेकिन रात में अगर वह नींद खराब कर दे या किसी पास के व्यक्ति को काट ले, तो उसके प्रति नफरत बढ़ जाती है।

जो लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं, उनके परिवार के साथ रहने वाले कुत्ते घर के छोटे-बड़े हर सदस्य का ध्यान रखते हैं। घर की महिलाओं के साथ खेतों में जाना, उन्हें जंगली जानवरों से बचाना, यह सब उनकी जिम्मेदारी में आता है। कस्बा स्तर पर भी कुत्तों की देखभाल की जाती है, लेकिन शहरों में बेचारे कुत्तों को दो वक्त का खाना भी मुश्किल से मिलता है, क्योंकि यहां गाय और कुत्ते के लिए अलग से भोजन निकालने की कोई परंपरा नहीं होती। शहरों में कुत्ता प्रेमी लोग उन्हें पालते हैं और उनके इलाज के लिए अलग से आदमी भी रखते हैं, लेकिन हर किसी को आज्ञाकारी कुत्ते ही पसंद आते हैं।

कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं के कारण देश के सभी कुत्तों का जीवन खतरे में पड़ता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों को कहां खाना खिलाया जाए, इस संबंध में आचार संहिता तय की है। यदि कुत्ता काट ले, तो पीड़ित को उचित मुआवजा मिले, ऐसी व्यवस्था भी की गई है।

एक ओर ऐसे लोग हैं, जो कुत्तों को चारों ओर से घेरकर लकड़ी के डंडों से पीट-पीटकर मार देने में पिशाचीय आनंद लेते हैं, तो दूसरी ओर ऐसे लोग भी हैं जो कुत्तों के लिए अस्पताल बनाते हैं और उनका इलाज करते हैं।

यहां कुत्तों के प्रति घृणा और कुत्तों के चमत्कार, दोनों तरह की बातें सामने आई हैं। ये दोनों एक-दूसरे के बिलकुल विपरीत घटनाक्रम हैं। हाल ही में केरल के कामारड्डी जिले के गांवों में लगभग 500 कुत्तों को जहर देकर मार डाला गया। सुबह गांव के लोगों ने देखा कि चारों ओर मरे हुए कुत्ते पड़े हैं। पर्दे के पीछे की कहानी यह है कि गांव के चुनाव में खड़ी एक उम्मीदवार की पैनल ने यह घोषणा की थी कि अगर वे चुने गए, तो गांव से कुत्तों का पूरी तरह सफाया कर देंगे।

इन लोगों ने बाहर से एक व्यक्ति को बुलाकर उसे कुत्तों का सफाया करने का ठेका दिया था। उस व्यक्ति ने कुत्तों के लिए खाने के लड्डू बनाए और उनमें जहर मिला दिया। लड्डू पसंद करने वाले कुत्ते उन्हें खाने के लिए टूट पड़े और मौत के मुंह में चले गए।

ठंडे दिल से लगभग 500 कुत्तों की हत्या करने का यह मामला काफी चर्चा में रहा। अधिकारियों को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, जांच शुरू की गई और करीब पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया। जैसे-जैसे लोगों को इस घटना का पता चला, वैसे-वैसे उनके दिलों में करुणा जागने लगी।

कुत्तों से जुड़ा एक और मामला ऐसा भी है, जिसमें लोग कुत्ते के व्यवहार को देखकर उसके दर्शन करने पहुंच गए। यह घटना बिजनौर की है, जहां एक चमत्कारी कुत्ते को देखने के लिए लोग उमड़ पड़े थे। यह कुत्ता स्थानीय मंदिर में स्थापित मां दुर्गा और हनुमानजी की मूर्तियों की परिक्रमा करने लगा था। शुरुआत में किसी का ध्यान नहीं गया, लेकिन दूसरे दिन उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटने लगी।

तीसरे दिन भी कुत्ते ने परिक्रमा जारी रखी, तो लोग उसके दर्शन करने टूट पड़े। वहां इतनी भीड़ हो गई कि पुलिस को बुलाना पड़ा। लोग कहने लगे कि भैरवनाथ स्वयं हनुमानजी की परिक्रमा करने आए हैं।

कुत्तों की हत्या करने के बजाय उनकी नसबंदी (खस्सीकरण) किया जा सकता था। लेकिन मानवजाति यह मान बैठी है कि पृथ्वी पर रहने का अधिकार केवल मनुष्य को ही है।

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