शहर-राज्य

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में विश्वस्तरीय आध्यात्मिक केंद्र बना ब्रज

-2019 के मुकाबले मथुरा में पर्यटकों की संख्या 1.6 करोड़ से बढ़कर 10 करोड़ के पार पहुंची

धार्मिक पर्यटन से स्थानीय रोजगार को मिली नई उड़ान, ‘रंगोत्सव’ से ब्रज को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

मनोज शर्मा

मथुरा। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  के नेतृत्व वाली सरकार के सफल 9 वर्षों के ‘नव निर्माण’ ने ब्रज भूमि की तस्वीर पूरी तरह से बदल दी है। दशकों तक बुनियादी सुविधाओं की उपेक्षा झेलने वाली कान्हा की नगरी मथुरा-वृंदावन आज ‘विकास भी, विरासत भी’ के संकल्प का सबसे जीवंत उदाहरण बन चुकी है। सरकार ने यहाँ केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं खड़ा किया, बल्कि द्वापर युग की उस आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक भव्यता को आधुनिक सुविधाओं के साथ पुनर्जीवित किया है, जो आज पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

     वर्ष 2017 में सत्ता संभालते ही सरकार ने ब्रज के सर्वांगीण विकास के लिए ‘उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद’ का गठन किया, जो इस क्षेत्र के कायाकल्प का मुख्य आधार बनी। आज कुसुम सरोवर, राधा कुंड, मानसी गंगा और नारद कुंड जैसे प्राचीन उपेक्षित स्थल अपने असली वैभव में लौट आए हैं। वहां बने पक्के घाट, सफाई व्यवस्था और अत्याधुनिक ‘लाइट एंड साउंड शो’ पर्यटकों को एक दिव्य अनुभव प्रदान कर रहे हैं।

      तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए बुनियादी ढांचे का अभूतपूर्व विकास किया गया है। हाईवे और एक्सप्रेस-वे से मथुरा की कनेक्टिविटी शानदार हुई है। बरसाना में श्री लाडली जी (श्री राधा-रानी जी) मंदिर तक बुजुर्गों, दिव्यांगों, बच्चों आदि के लिए रोप-वे की शुरुआत एक बड़ी राहत है। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया कि मथुरा- वृंदावन को ‘स्मार्ट सिटी’ बनाया जा रहा है, जिसमें अंडरग्राउंड डक्ट, वायरिंग और सीसीटीवी का मजबूत नेटवर्क शामिल है। श्री बांके बिहारी जी मंदिर के आस-पास जनसुविधाओं के विकास से भविष्य में दर्शन और भी सुरक्षित और सुगम होंगे।

 नव निर्माण का सबसे बड़ा प्रमाण यहाँ उमड़ता जनसैलाब है। जहां 2019 में मथुरा आने वाले पर्यटकों की संख्या महज 1.6 करोड़ थी, वह 2025 में 10 करोड़ का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर गई है। सरकार ने ब्रज की होली को ‘रंगोत्सव’ का रूप देकर कुंभ जैसी वैश्विक पहचान दी है। हाल ही में श्री बांके बिहारी जी मंदिर में महज 15 दिनों में (25 फरवरी से 10 मार्च तक) 45 लाख श्रद्धालुओं का दर्शन करना और 51 लाख से अधिक लोगों का ‘लाइव स्ट्रीमिंग’ से जुड़ना साबित करता है कि ब्रज अब देश का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन केंद्र है।

   हस्तशिल्प कंठी माला, ठाकुर जी की पोशाक और प्रसिद्ध पेड़ा उद्योग को नई गति दी है, जिससे लाखों स्थानीय रोजगार पैदा हुए हैं। वहीं सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए वृंदावन में ‘गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी’ की स्थापना की गई है। लुप्त हो रही ‘सांझी कला’ को ‘सांझी महोत्सव’ के जरिए युवा पीढ़ी तक पहुंचाया जा रहा है। साथ ही प्रदूषण मुक्त ब्रज के लिए इलेक्ट्रिक बसों का संचालन और यमुना घाटों की सफाई सुनिश्चित की जा रही है।

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