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सॉफ्टवेयर विकास एवं डाटा विश्लेषण पर व्यावहारिक प्रशिक्षण से छात्रों को मिला करियर का स्पष्ट मार्ग

गाजियाबाद। डासना स्थित एसडीजीआई ग्लोबल यूनिवर्सिटी के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय द्वारा विद्यार्थियों को उद्योग जगत की वास्तविक आवश्यकताओं से जोडऩे के उद्देश्य से दो विशेष तकनीकी कार्यशालाओं का सफल आयोजन किया गया।  ‘एसडीई अनलॉक्ड’ तथा  ‘एनालिटिक्स अनलॉक्ड’ विषयों पर आयोजित इन कार्यशालाओं में बी.टेक चतुर्थ एवं षष्ठम सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दोनों सत्रों में कुल 137 छात्रों की सक्रिय उपस्थिति रही, जिसने कार्यक्रम को अत्यंत प्रभावशाली बना दिया। कार्यक्रम की शुरुआत आमंत्रित विशेषज्ञों के स्वागत से हुई।  ‘एसडीई अनलॉक्ड’ सत्र में ब्रेन मेंटर्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित श्रीवास्तव ने अपने 25 वर्षों के अनुभव के आधार पर विद्यार्थियों को सॉफ्टवेयर विकास अभियंता बनने की वास्तविक प्रक्रिया से अवगत कराया। वहीं  ‘एनालिटिक्स अनलॉक्डÓ सत्र में डाटा विश्लेषक एवं सॉफ्टवेयर डेवलपर अरुण कुमार ने 15 वर्षों के अनुभव के साथ डाटा विश्लेषण की व्यावहारिक जानकारी साझा की। विशेषज्ञों का सम्मान निदेशक प्रो. (डॉ.) जयदीप कुमार, विभागाध्यक्ष डॉ. कमलेश कुमार गौतम, सहायक प्राध्यापक राजेंद्र राजौरिया, बिजॉय जोस तथा रोहित राणा द्वारा पौधा एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया। सॉफ्टवेयर विकास कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को ऑनलाइन मूल्यांकन अभ्यास, साक्षात्कार तैयारी, डाटा संरचना एवं एल्गोरिद्म के पैटर्न, प्रणालीगत सोच तथा उद्योग की अपेक्षाओं के अनुरूप परियोजना निर्माण की विस्तृत जानकारी दी गई। चयनित एवं असफल अभ्यर्थियों के बीच अंतर को उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए छात्रों को स्पष्ट करियर मार्गदर्शन प्रदान किया गया। खुले संवाद सत्र में विद्यार्थियों ने अपने प्रश्न पूछकर विशेषज्ञों से समाधान प्राप्त किया। डाटा विश्लेषण कार्यशाला  ‘शून्य से डैशबोर्ड विशेषज्ञ बनने तक’ विषय पर केंद्रित रही, जिसमें डाटा की आधारभूत समझ, दृश्य प्रस्तुतीकरण तकनीक तथा प्रभावी डैशबोर्ड निर्माण की पूरी प्रक्रिया को व्यवहारिक तरीके से समझाया गया। विशेषज्ञों ने विभिन्न उद्योग स्तर के उपकरणों और वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से डाटा आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति महेन्द्र अग्रवाल ने इस प्रकार की कार्यशालाओं की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को नवीनतम तकनीकों से जोडऩा समय की आवश्यकता है और संस्थान इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है। प्रो-कुलाधिपति (प्रशासन) पियूष श्रीवास्तव ने इसे कौशल विकास एवं उद्योग उन्मुख शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रसेनजीत कुमार ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं विद्यार्थियों के तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। निदेशक प्रो. (डॉ.) जयदीप कुमार ने बताया कि कार्यक्रम से छात्रों को करियर एवं रोजगार के अवसरों को समझने का बेहतर मंच प्राप्त हुआ। पूरे आयोजन के दौरान विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने तकनीकी ज्ञान, विश्लेषणात्मक सोच तथा समस्या समाधान क्षमता को और अधिक सुदृढ़ किया। यह कार्यशाला सैद्धांतिक शिक्षा और व्यावहारिक अनुभव के बीच की दूरी को कम करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई। कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहायक प्राध्यापक सुवायन चटर्जी, सिद्धांत शर्मा एवं बिजॉय जोस का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन द्वितीय वर्ष की छात्रा नव्या चौहान ने प्रभावी ढंग से किया और पूरे सत्र का समन्वय सुनिश्चित किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भविष्य में भी ऐसे उद्योग उन्मुख प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की, जो विद्यार्थियों के समग्र विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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