ग़ाज़ियाबाद

पेट्रोल-डीजल बचत और सीमित सोना खरीद से मजबूत होगी देश की अर्थव्यवस्था  -काफिला संस्कृति, अनावश्यक खर्च और विदेशी दौरों में कटौती की उठाई मांग

गाजियाबाद। देश की आर्थिक मजबूती और संसाधनों के संतुलित उपयोग को लेकर राष्ट्रीय व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पंडित अशोक भारतीय ने पेट्रोल-डीजल की बचत और अनावश्यक सोना खरीद से बचने की प्रधानमंत्री की अपील का स्वागत करते हुए इसे दूरदर्शी निर्णय बताया है। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बचतें ही भविष्य में बड़ी आर्थिक शक्ति का आधार बनती हैं और यही सोच देश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना सकती है। पंडित अशोक भारतीय ने कहा कि  ‘त्रण-त्रण से धरती और बूंद-बूंद से सागर बनता हैÓ उसी प्रकार यदि देशवासी ईंधन की बचत और सोच-समझकर निवेश करने की आदत अपनाएं तो देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी तथा विदेशी मुद्रा पर दबाव भी कम होगा। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की खपत कम होने से आयात पर निर्भरता घटेगी और डॉलर के मुकाबले भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा देशवासियों से पेट्रोल-डीजल बचाने और बिना आवश्यकता सोना न खरीदने की अपील को समय की जरूरत बताते हुए कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और युद्धों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में वृद्धि हुई है, लेकिन भारत सरकार ने आम जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े इसके लिए कई बार स्वयं आर्थिक भार उठाया है। यह निर्णय आम नागरिकों के हित में सराहनीय कदम है। पंडित अशोक भारतीय ने जनता से अपील करते हुए कहा कि निजी वाहनों के अत्यधिक उपयोग की बजाय सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को अपनाया जाए। साथ ही पूल प्रणाली लागू कर एक ही वाहन से अधिक लोगों के आवागमन की व्यवस्था की जाए, जिससे ईंधन की खपत कम हो और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा कि यदि समाज सामूहिक जिम्मेदारी निभाए तो ईंधन बचत राष्ट्रीय अभियान बन सकता है।
उन्होंने शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व से भी काफिला संस्कृति पर नियंत्रण लगाने की करबद्ध प्रार्थना करते हुए कहा कि सरकारी परिवहन व्यवस्था की प्रत्येक माह समीक्षा होनी चाहिए। यदि खर्चों में कमी नहीं आती तो परिवहन बजट में कटौती जैसे कठोर निर्णय भी लिए जाने चाहिए, ताकि सरकारी संसाधनों का उपयोग जिम्मेदारी से हो सके। इसके साथ ही उन्होंने मंत्रियों और अधिकारियों के विदेशी दौरों पर होने वाले खर्च की समीक्षा कर उसमें आवश्यक कटौती करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि सरकारी खर्चों में अनुशासन लाकर देश की अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त बोझ से बचाया जा सकता है। पंडित अशोक भारतीय ने भविष्य में  ‘एक राष्ट्र-एक चुनावÓ प्रणाली लागू करने की भी वकालत करते हुए कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों में भारी आर्थिक संसाधन खर्च होते हैं। यदि चुनाव प्रणाली को व्यवस्थित किया जाए तो राष्ट्रीय धन की बड़ी बचत संभव है और विकास कार्यों में अधिक निवेश किया जा सकता है।

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