रिफाइनरी नगर में राष्ट्रीय पक्षी मोर की जान पर मंडरा रहा खतरा

-आवारा कुत्तों का गिरोह घेरकर कर रहा है मोरों का शिकार
मथुरा। रिफाइनरी नगर टाउनशिप, जिसे अपनी हरियाली और शांति के लिए जाना जाता है, इन दिनों आवारा कुत्तों के आतंक का केंद्र बन गई है। स्थिति इतनी विकट हो गई है कि देश का गौरव और हमारा राष्ट्रीय पक्षी ‘मोर’ अब यहाँ सुरक्षित नहीं है। रिफाइनरी नगर में रहने वाले निवासियों के अनुसार, टाउनशिप में आवारा कुत्तों का एक बड़ा समूह सक्रिय हो गया है, जो मोरों को घेरकर उनका शिकार कर रहा है। मोरों की घटती संख्या और आए दिन मिल रहे उनके अवशेषों ने पर्यावरण प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है। इस समस्या की जड़ शॉपिंग सेंटर स्थित दो मीट की दुकानों को माना जा रहा है। आरोप है कि इन दुकानों से फेंकी जाने वाली हड्डियों और मांस के टुकड़ों को खाने के बाद कुत्तों की प्रवृत्ति हिंसक और शिकारी हो गई है। मांस का चस्का लगने के कारण अब ये कुत्ते टाउनशिप के शांत वातावरण में मोरों को अपना निवाला बना रहे हैं। आवारा कुत्तों का आतंक केवल पक्षियों तक सीमित नहीं है, हाल ही में मथुरा रिफाइनरी अस्पताल के एक सीनियर डॉक्टर को आवारा कुत्ते ने काट लिया था एवं शाम के समय नगर में टहलने वाले बच्चों पर भी आवारा कुत्ते हमला कर देते हैं। जिसकी वजह से टाउनशिप के छोटे बच्चे पार्क और सड़कों पर निकलने से भी अब कतरा रहे हैं, क्योंकि कुत्ते अक्सर उन पर झपट्टा मार देते हैं। आवारा कुत्तों का नगर वासियों में इस कदर भय व्याप्त है कि शाम के समय लोग अकेले टहलने से भी डर रहे हैं। नगर वासियों का कहना है कि, रिफाइनरी प्रबंधन द्वारा सुरक्षा और संरक्षण के बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट है। मोरों के संरक्षण के लिए कोई ठोस कदम अभी तक न उठाए जाने से नगर वासियों ने भी नाराजगी जताई है।
नगर वासियों का कहना है कि “हमारा राष्ट्रीय पक्षी हमारा गौरव है, रिफाइनरी प्रबंधन को जल्द ही इन हिंसक कुत्तों को पकड़ने और मीट की दुकानों पर नियंत्रण लगाने के कदम उठाने चाहिए, टाउनशिप की जैव विविधता इस तरह नष्ट हो रही है। नगर वासियों का यह भी कहना है कि प्रबंधन द्वारा आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान चलाना चाहिए एवं शॉपिंग सेंटर की मीट दुकानों पर स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन के कड़े नियम लागू किए जाने चाहिए व राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण के लिए टाउनशिप में सुरक्षित ‘बर्ड ज़ोन’ या फेंसिंग की व्यवस्था भी होनी चाहिए ताकि पक्षियों का संरक्षण किया जा सके। पूर्व में भी वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश सिंह तरकर द्वारा राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण का मामला प्रबंधन तक पहुंचाया गया था, रिफाइनरी प्रबंधन ने आश्वासन भी दिया था, लेकिन धरातल पर अभी तक कोई भी समाधान नही किया गया है। प्रबंधन की यह लापरवाही राष्ट्रीय पक्षी मोर के जीवन के लिए घातक साबित हो रही है, इस तरह की लापरवाही प्रबंधन की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता पर सवालिया निशान खड़े कर रही है, देखने वाली बात यह होगी कि रिफाइनरी प्रबंधन आखिर कब जाकर राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाएगा।



