भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध भाकियू चढ़ूनी ने शुरू किया विरोध प्रदर्शन , प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

भारत-अमेरिका फ्री ट्रेड डील भारतीय किसानों के लिए “डेथ वारंट”
मथुरा। भाकियू चढूनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी के आव्हान पर केंद्र सरकार की कथित किसान-विरोधी नीतियों तथा भारत-अमेरिका फ्री ट्रेड डील के संभावित दुष्प्रभावों के विरोध में भाकियू चढूनी कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को विरोध प्रदर्शन कर नारेबाजी करते हुए मांगों को लेकर जिला अधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को प्रेषित ज्ञापन सौंपा। जिला अध्यक्ष संजय पाराशर ने कहा कहा कि भारत के किसान पहले से ही गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे हैं—बढ़ती लागत, फसलों के उचित मूल्य का अभाव, प्राकृतिक आपदाएं तथा कर्ज का बोझ से जूझते हुए किसान आत्महत्या तक के कदम उठा रहा है । ऐसे में यदि विदेशी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में प्रवेश दिया जाता है, तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा क्योंकि भारत की खेती आजीवका है जबकि विदेशो में खेती व्यापार है। इसलिए सस्ते आयातित उत्पाद भारतीय किसानों की उपज की कीमतों को गिरा देंगे, जिससे उनकी आय पर और प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा । इसके अतिरिक्त, ट्रेड डील के माध्यम से बहुराष्ट्रीय कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे कृषि क्षेत्र में निजीकरण और कॉर्पोरेट नियंत्रण बढ़ेगा । यह स्थिति न केवल किसानों की स्वतंत्रता को प्रभावित करेगी बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा के लिए भी खतरा उत्पन्न करेगी जिससे किसानों की आत्महत्याए की संख्या में इजाफा होगा और भारी संख्या किसान मजदूरो में तब्दील होगा और भारी बेरोजगारी फैलेगी जोकि देश हित में नहीं है। मांग की गई कि कृषि और डेयरी व पोल्ट्री और किसानो से जुड़े सहायक धंधो को किसी भी प्रकार के मुक्त व्यापार समझौते से बाहर रखा जाए । न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी सुनिश्चित की जाए देश के किसानों के हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किसी भी ऐसे ट्रेड डील / मुक्त व्यापार समझौते को न किया जाए। दूसरे चरण में संगठन पूरे देश में सभी सांसदों को विरोध प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपेगा। यदि सरकार फिर भी नहीं मानी, तो आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन में मांग की गई कि स्मार्ट मीटर/ प्रीपेड मीटर को जबरजस्ती न थोपा जाए क्योंकि ज्यादातर आबादी की कोई रेगुलर आमदनी नहीं है। प्रदेश महासचिव सतीश चंद्र ने कहा तहसीलों पर किसानों का उत्पीड़न शोषण किया जा रहा है। दाखिल खारिज, कुड़ा बटवारा, जन्म, मृत्यु ,आय प्रमाणपत्रों के लिए लोगों को परेशान किया जाता है। एंटी करप्शन टीम से बचने के लिए प्राइवेट कर्मचारियों द्वारा कार्य कराए जा रहे हैं। बिजली की अघोषित कटौती हो रही है। भीषण गर्मी में बिजली व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। विभाग में किसानों का उत्पीड़न कर रहा है। अधिकारी बेलगाम होकर मनमानी कर रहे हैं। बिजली आपूर्ति में तत्काल सुधार कर भ्रष्टाचार, शोषण पर रोक लगाई जाए। निराश्रित गौबंश सड़कों, गांव की गलियों एवं खेतों पर घूम रहे हैं। लोगों पर हमला कर रहे हैं, खेतों में भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिम्मेदार मोन साधे हुए हैं।नहर, रजवाह, माइनर की सिल्ट से अटे पड़े हैं। इनकी समय से सफाई नहीं हो रही है। रवी की फसल के समय सफाई का काम शुरू किया जाता है जिससे किसानों को समय पर सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलता है। जनपद में खाद की समस्या है। गंगा जल परियोजना कार्यदाई संस्था का काम लगातार पिछड़ता जा रहा है, जिसके कारण ग्रामीण इलाकों में खारे पानी की समस्या का कोई निराकरण होता दिखाई नहीं दे। जगदीश तोमर, राधेश्याम सिकरवार, कुंतभोज, गौरव तोमर, दिनेश तोमर, भुल्ली सिंह, रवि मुहम्मद, राजकुमार, कैलाश तोमर, हरिओम, रंजीत सिंह, रूपनारायण, रामशरण सिंह, गिरवर सिंह, गोपाल, मोहन सिंह, विजय, शंकर सिंह, योगेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।



