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गंगा एक्सप्रेस-वे से तीर्थ सर्किट हुआ मजबूत, कई धार्मिक स्थल होंगे कनेक्ट

उज्जवल रस्तौगी वरिष्ठ पत्रकार

गंगा भारत की आस्था की सबसे पवित्र धारा मानी जाती है। सदियों से इसके किनारे बसे तीर्थस्थल श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र रहे हैं। गंगा एक्सप्रेस-वे अब आस्था की धारा के रूप में उत्तर प्रदेश में एक नए विकास का आकार ले रहा है। । यह एक्सप्रेस-वे केवल एक रोड प्रोजेक्ट नहीं है बल्कि उत्तर प्रदेश के आध्यात्मिक पर्यटन को नई गति देने वाला एक बड़ा आधार बन रहा है।
गंगा एक्सप्रेस-वे का सबसे बड़ा योगदान यह होगा कि यह उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहे पांच प्रमुख स्पिरिचुअल कॉरिडोर को मजबूत आधार प्रदान करेगा। इन कॉरिडोरों का उद्देश्य राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों को एक व्यवस्थित धार्मिक पर्यटन नेटवर्क में जोड़ना है, जिससे श्रद्धालु एक ही यात्रा में कई महत्वपूर्ण तीर्थों के दर्शन कर सकें।
मेरठ से प्रयागराज तक बनने वाला गंगा एक्सप्रेस-वे प्रदेश के कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को सीधे जोड़ने जा रहा है। इस एक्सप्रेस-वे के जरिए गढ़मुक्तेश्वर, कल्कि धाम, बेल्हा देवी धाम, चंद्रिका देवी शक्ति पीठ और त्रिवेणी संगम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगी। यह वे स्थान हैं जहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
प्रयागराज-विंध्याचल-काशी कॉरिडोर इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। त्रिवेणी संगम से विंध्याचल देवी धाम और आगे काशी तक की यात्रा अब अधिक तेज और सुगम होगी। यह कॉरिडोर शक्ति और शिव के प्रमुख तीर्थों को जोड़ते हुए धार्मिक पर्यटन का एक शक्तिशाली मार्ग बन सकता है।
इसी तरह प्रयागराज-अयोध्या-गोरखपुर कॉरिडोर रामभक्ति से जुड़े प्रमुख स्थलों को जोड़ता है। प्रयागराज के संगम से अयोध्या में रामलला के दर्शन और आगे गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर तक पहुंच अब आसान होगी। यह मार्ग रामायण परंपरा से जुड़े तीर्थों को एक मजबूत धार्मिक सर्किट में बदल सकता है। प्रयागराज-लखनऊ-नैमिषारण्य कॉरिडोर भी आध्यात्मिक तौर से बेहद महत्वपूर्ण है। नैमिषारण्य को वह पवित्र स्थान माना जाता है जहां 88 हजार ऋषियों ने तपस्या की थी और जहां कई पुराणों का वाचन हुआ। बेहतर सड़क संपर्क के कारण यह क्षेत्र भी आध्यात्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में उभर सकता है।
रामायण से जुड़े स्थलों को जोड़ने वाला प्रयागराज-राजापुर-चित्रकूट कॉरिडोर भी गंगा एक्सप्रेस-वे से नई गति पाएगा। राजापुर, जो गोस्वामी तुलसीदास की जन्मभूमि है औक चित्रकूट तक का यह मार्ग श्रद्धालुओं को भगवान राम के वनवास से जुड़े पवित्र स्थलों तक ले जाता है।
इसके अलावा प्रयागराज-मथुरा-वृंदावन-शुक तीर्थ कॉरिडोर कृष्ण भक्ति से जुड़े प्रमुख स्थलों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। मथुरा और वृंदावन पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन केंद्र हैं। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण यहां आने वाले देशी और विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ सकती है।
दरअसल, गंगा एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के आध्यात्मिक पर्यटन को “डेस्टिनेशन से सर्किट” में बदलने की क्षमता रखता है। अभी तक श्रद्धालु अक्सर एक ही तीर्थ पर जाकर लौट आते थे, लेकिन बेहतर सड़क नेटवर्क बनने के बाद वे एक ही यात्रा में कई धार्मिक स्थलों का दर्शन कर सकेंगे।
इससे प्रदेश में धार्मिक पर्यटन की अवधि, खर्च और स्थानीय आर्थिक गतिविधियां तीनों बढ़ेंगी। एक्सप्रेस-वे के आसपास होटल, धर्मशाला, लोकल बाजार, ट्रांसपोर्ट सर्विस, हस्तशिल्प और प्रसाद से जुड़े छोटे व्यवसाय तेजी से विकसित होंगे।
आने वाले समय में काशी, अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा और नैमिषारण्य जैसे तीर्थ जब आधुनिक एक्सप्रेस-वे और धार्मिक कॉरिडोर से जुड़ेंगे तो उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बन सकता है। गंगा एक्सप्रेस-वे सिर्फ दूरी कम नहीं कर रहा, बल्कि यह आस्था की यात्रा को आसान बनाकर उत्तर प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नए युग से जोड़ रहा है।

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