ग़ाज़ियाबाद

डुंडाहेड़ा एसटीपी से बनेगी हरित ऊर्जा- अपशिष्ट जल से तैयार होगी बायो-सीएनजी-निजी सहभागिता मॉडल पर विकसित होगा संयंत्र, पर्यावरण संरक्षण के साथ बढ़ेगा नगर निगम राजस्व

गाजियाबाद। नगर निगम ने शहर को स्वच्छ, ऊर्जा आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बुधवार को डूंडाहेड़ा स्थित 70 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज शोधन संयंत्र पर बायो-सीएनजी संयंत्र स्थापित करने के लिए अनुबंध समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता गाजियाबाद बायोएनर्जी प्राइवेट लिमिटेड तथा वीए टेक वाबैग लिमिटेड के साथ किया गया है। नगर निगम की यह पहल अपशिष्ट जल प्रबंधन को केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित न रखकर उसे ऊर्जा उत्पादन और स्थायी राजस्व के स्रोत में बदलने की दिशा में एक अभिनव प्रयास मानी जा रही है। परियोजना निजी सहभागिता मॉडल के अंतर्गत निर्माण-संचालन-हस्तांतरण प्रणाली पर विकसित की जाएगी, जिसमें निजी कंपनियां संयंत्र का निर्माण और संचालन करेंगी तथा निर्धारित अवधि के बाद इसे नगर निगम को हस्तांतरित किया जाएगा। डुंडाहेड़ा सीवेज शोधन संयंत्र में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में अपशिष्ट जल का शोधन किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाली बायोगैस को अब व्यर्थ जाने देने के बजाय उच्च गुणवत्ता वाली बायो-सीएनजी में परिवर्तित किया जाएगा। तैयार बायो-सीएनजी का उपयोग परिवहन क्षेत्र, औद्योगिक इकाइयों तथा अन्य ऊर्जा आवश्यकताओं में किया जा सकेगा। इससे पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी और शहर को स्वच्छ ऊर्जा का नया स्रोत प्राप्त होगा।
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा कि गाजियाबाद नगर निगम आधुनिक शहरी प्रबंधन की दिशा में निरंतर नवाचार कर रहा है। उन्होंने बताया कि अपशिष्ट को संसाधन में बदलने की अवधारणा पर नगर निगम लगातार कार्य कर रहा है और यह परियोजना उसी सोच का परिणाम है। नगर आयुक्त ने कहा कि सीवेज से निकलने वाली गैस को उपयोगी ऊर्जा में बदलकर न केवल पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा, बल्कि नगर निगम को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी प्राप्त होगा। उन्होंने आगे कहा कि इस परियोजना से मीथेन गैस के अनियंत्रित उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार होगा और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में सहायता मिलेगी। नगर आयुक्त के अनुसार, आने वाले समय में गाजियाबाद को हरित एवं सतत शहर के रूप में विकसित करने के लिए ऐसी परियोजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। महापौर सुनीता दयाल ने इस अवसर पर कहा कि नगर निगम का लक्ष्य केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग करते हुए नागरिकों को बेहतर पर्यावरण प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि अपशिष्ट जल से स्वच्छ ईंधन तैयार करने की यह पहल गाजियाबाद को देश के अग्रणी पर्यावरण-अनुकूल शहरों की श्रेणी में स्थापित करेगी। महापौर ने बताया कि इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और युवाओं को हरित ऊर्जा क्षेत्र में कार्य करने का अवसर मिलेगा। परियोजना के अंतर्गत स्थापित होने वाला बायो-सीएनजी संयंत्र अपशिष्ट जल शोधन के दौरान उत्पन्न जैविक गैस को शुद्ध कर उच्च गुणवत्ता वाले ईंधन में परिवर्तित करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार की परियोजनाएं सर्कुलर अर्थव्यवस्था की अवधारणा को मजबूत करती हैं, जिसमें अपशिष्ट को पुन: उपयोग में लाकर आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों लाभ प्राप्त किए जाते हैं। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, संयंत्र के संचालन काल में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। इसके अतिरिक्त रिवर्स टिपिंग शुल्क व्यवस्था के माध्यम से नगर निगम को स्थायी राजस्व प्राप्त होगा, जिससे शहर की अन्य जनहित योजनाओं को भी वित्तीय मजबूती मिलेगी। शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका अब केवल आधारभूत सेवाएं प्रदान करने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि ऊर्जा उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक आत्मनिर्भरता जैसे क्षेत्रों में भी उनका योगदान बढ़ रहा है। डुंडाहेड़ा बायो-सीएनजी परियोजना इसी परिवर्तन का प्रतीक बनकर उभर रही है।

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