राष्ट्रपति ने परोसी अक्षय पात्र की 5 अरबवीं थाली

पौष्टिक भोजन देश की मानव पूंजी में एक महत्वपूर्ण निवेश: द्रोपदी मुर्मू
मथुरा। अक्षय पात्र फाउंडेशन ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 5 अरबवीं थाली परोसने का मील का पत्थर पार किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में भव्य समारोह आयोजित किया गया, जिसमें भारत की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
इस अवसर पर फाउंडेशन के संस्थापक-चेयरमैन मधु पंडित दास तथा वाइस चेयरमैन चंचलापति दास सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का विषय ‘सुपोषित और सुशिक्षित भारत से विकसित भारत’ रखा गया, जो बच्चों के पोषण एवं शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की दिशा में सामूहिक प्रयासों को रेखांकित करता है।
समारोह में ट्रस्टी बोर्ड के सदस्य, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, नीति-निर्माता, शिक्षाविद, परोपकारी संस्थाएं तथा बड़ी संख्या में हितधारक उपस्थित रहे। साथ ही, फाउंडेशन के पूर्व लाभार्थी, छात्र, अभिभावक एवं शिक्षक भी इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बने। राष्ट्रपति मुर्मू ने बच्चों को भोजन परोसकर तथा उपहार प्रदान कर इस उपलब्धि का उत्सव मनाया।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के अंतर्गत बच्चों को दिया जाने वाला पौष्टिक भोजन देश की मानव पूंजी में एक महत्वपूर्ण निवेश है। उन्होंने बच्चों को भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश का आधार बताते हुए कहा कि यही वर्ग भविष्य में राष्ट्र की प्रगति को गति देगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस योजना से स्कूलों में नामांकन, उपस्थिति और सीखने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने वक्तव्य में ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी प्रेरणा से प्रारंभ हुई यह पहल आज एक व्यापक जनआंदोलन बन चुकी है। उन्होंने फाउंडेशन के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के 25,000 से अधिक स्कूलों में प्रतिदिन 23.5 लाख बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना एक असाधारण उपलब्धि है।
इस अवसर पर मधु पंडित दास ने कहा कि 25 वर्षों की इस सेवा यात्रा में 5 अरब भोजन परोसना केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि उस संकल्प का पुनःस्मरण है कि कोई भी बच्चा भूखा न रहे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित पोषण योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि ये पहलें बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
वाइस चेयरमैन चंचलापति दास ने कहा कि यह उपलब्धि सरकार, दाताओं, साझेदारों और समर्पित कार्यकर्ताओं के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (च्च्च्) मॉडल को इस सफलता का आधार बताते हुए भविष्य में और अधिक बच्चों तक पहुंचने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
वर्ष 2000 में स्थापित द अक्षय पात्र फाउंडेशन ने अपनी यात्रा की शुरुआत बेंगलुरु से की थी। प्रारंभ में कर्नाटक सरकार के साथ ‘अक्षरा दसोहा’ मध्याह्न भोजन योजना के तहत कार्य करते हुए, संगठन ने धीरे-धीरे अपने संचालन का विस्तार देशभर में किया। आज यह विश्व का सबसे बड़ा एनजीओ-चालित स्कूल भोजन कार्यक्रम बन चुका है।
फाउंडेशन ने मात्र 12 वर्षों में 1 अरब भोजन परोसने का लक्ष्य हासिल किया। वर्ष 2012 में एन. आर. नारायण मूर्ति ने 1 अरबवीं थाली परोसी, जबकि 2016 में प्रणब मुखर्जी ने 2 अरबवीं थाली परोसकर इस उपलब्धि को आगे बढ़ाया। वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वृंदावन में 3 अरबवीं थाली परोसी, और 2024 में न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 4 अरब भोजन परोसने का उत्सव मनाया गया।
वर्तमान में फाउंडेशन देशभर में 78 अत्याधुनिक रसोईघरों के माध्यम से प्रतिदिन 23.5 लाख बच्चों को ताजा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा रहा है, और वर्ष 2030 तक इस संख्या को 30 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।



