वैशाली-गोकुलपुरी मेट्रो कॉरिडोर से हिंडन एयरपोर्ट होगा सीधे कनेक्ट, जीडीए ने बढ़ाया प्रोजेक्ट आगे-इंदिरापुरम-वसुंधरा-ट्रांस हिंडन क्षेत्र के लाखों लोगों को मिलेगा सीधा लाभ-मेट्रो, नमो भारत और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी से बनेगा मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क

गाजियाबाद। दिल्ली-एनसीआर में मेट्रो नेटवर्क विस्तार की दिशा में गाजियाबाद के लिए एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ गया है। वैशाली से गोकुलपुरी तक प्रस्तावित नया मेट्रो कॉरिडोर अब योजना स्तर से आगे बढ़ते हुए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार किए जाने के चरण में पहुंच गया है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) को इस परियोजना की डीपीआर तैयार करने का अनुरोध किया है। करीब 16 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित इस कॉरिडोर को गाजियाबाद की भविष्य की लाइफलाइन माना जा रहा है। यह मेट्रो लाइन वैशाली स्थित ब्लू लाइन मेट्रो स्टेशन को गोकुलपुरी की पिंक लाइन से जोड़ेगी। परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह हिंडन सिविल टर्मिनल एयरपोर्ट से होकर गुजरेगी, जिससे गाजियाबाद और पूर्वी दिल्ली के यात्रियों को एयरपोर्ट तक सीधे मेट्रो कनेक्शन की सुविधा मिल सकेगी। वर्तमान में हिंडन एयरपोर्ट दिल्ली मेट्रो की रेड लाइन के निकटतम स्टेशनों—दिलशाद गार्डन और मेजर मोहित शर्मा राजेंद्र नगर—से लगभग पांच किलोमीटर दूर स्थित है। एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए यात्रियों को सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है। नया कॉरिडोर बनने के बाद यह दूरी और समय दोनों कम हो जाएंगे, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित रूट में गोकुलपुरी, गगन विहार, पसौंडा, हिंडन एयरपोर्ट, मोहननगर, साहिबाबाद और वैशाली जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल किए जा सकते हैं। विशेष रूप से मोहननगर को इंटरचेंज स्टेशन के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां से यात्रियों को रेड लाइन और अन्य मेट्रो रूट्स पर आसानी से ट्रांसफर की सुविधा मिल सकेगी। इससे इंदिरापुरम, वसुंधरा और ट्रांस हिंडन क्षेत्र में रहने वाले पांच लाख से अधिक लोगों की दैनिक यात्रा आसान हो जाएगी।
यह परियोजना भविष्य में नमो भारत (आरआरटीएस) कॉरिडोर और अन्य मेट्रो लाइनों से भी जुड़ सकती है, जिससे दिल्ली-एनसीआर में मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल यातायात दबाव कम होगा बल्कि निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी और पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा। हालांकि, मेट्रो विस्तार की राह पूरी तरह आसान नहीं है। नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी से साहिबाबाद तक प्रस्तावित मेट्रो परियोजना वर्ष 2018 से वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण लंबित पड़ी है। इस परियोजना की डीपीआर पहले ही लगभग 1,873 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के साथ तैयार की जा चुकी है। जीडीए द्वारा 16वें वित्त आयोग के तहत करीब 2,441 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की मांग भी की गई थी। अब आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा एजेंसियों को नई परियोजनाओं की डीपीआर तैयार करने के निर्देश मिलने के बाद इस कॉरिडोर को गति मिलने की संभावना बढ़ गई है। अधिकारियों का मानना है कि डीपीआर तैयार होने के बाद केंद्र और राज्य सरकार से वित्तीय स्वीकृति प्राप्त करना आसान हो जाएगा। सूत्रों के अनुसार डीएमआरसी आने वाले कुछ महीनों में डीपीआर तैयार कर संबंधित एजेंसियों को सौंप सकता है। इसके बाद परियोजना की फंडिंग, मंजूरी और निर्माण प्रक्रिया शुरू होगी। यदि योजना निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में गाजियाबाद का मेट्रो नेटवर्क काफी मजबूत हो जाएगा और शहर की कनेक्टिविटी नए स्तर पर पहुंच जाएगी। कुल मिलाकर वैशाली-गोकुलपुरी मेट्रो कॉरिडोर गाजियाबाद को दिल्ली, एयरपोर्ट और क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क से जोडऩे वाली महत्वपूर्ण परियोजना साबित हो सकती है, जो तेज, सुरक्षित और सुगम यात्रा के नए विकल्प प्रदान करेगी तथा तेजी से विकसित हो रहे शहर की यातायात जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी।



