शहर में निकली भगवान झूलेलाल की भव्य शोभायात्रा

वेलकम इंडिया
मथुरा। वरूणावतार भगवान झूलेलाल जन्मोत्सव के अंतर्गत सिंधी जनरल पंचायत ने मथुरा में 75 वर्ष पूर्व की परम्परा को कायम रखते हुए शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली। भगवान श्रीकृष्ण की नगरी आयोलाल झूलेलाल से जयकारों से गूंज उठी। ब्रज में सारा दिन चेटीचण्ड पर्व की धूम रही, जिसकी रौनक में शहर रंगा रहा। चहुंओर सिंधीयत नजर आयी। चेटीचण्ड पर्व का मुख्य आकर्षण भगवान झूलेलाल की भव्य शोभायात्रा रही, जो सेठ बाडे़ तिलक नगर से शुरू हुई। शोभायात्रा में सिंधी समुदाय की प्रसिद्व डंडेशाही का आकर्षक खास था, जिसमें संगीत की मधुर ध्वनि के साथ नाचते नौजवानों की लय कदम ताल तथा डण्डों की खनक का रोमांचकारी प्रदर्शन दर्शनीय था। स्थान-स्थान पर छोटे बच्चों द्वारा प्रस्तुत डंडेशाही का मनोरंजक तथा भावपूर्ण नजारा देखते को राह चलते लोग रूक गये, सभी ने डंडेशाही में करतब दिखाते युवकों की सराहना की। मुख्य संयोजक रामचंद्र खत्री के नेतृत्व में निकली शोभायात्रा में सर्वप्रथम ध्वज लिए घुड़सवार, परिक्रमा करते श्रीगणेश, कमल के फूल पर माता लक्ष्मी, शिव की जटाओं में गंगा अवतार, गरूड़ पर सवार श्री विष्णु, मां शेरावाली, श्री रामलला की झांकी तथा भगवान झूलेलाल की सजीली झांकियों के मध्य नारीशक्ति को समर्पित सिंधी महिलाओं की झांकी प्रमुख थी, मध्य में दो बैण्ड, आगरा तथा मथुरा की नफीरी, झूलेलाल की पंचमुखी अमर ज्योति, श्री नाथ जी का साथ सकीर्तन करते श्रद्वालु भक्तजन व साधुजन चल रहे थे। अनूठे अंदाज की इस शोभायात्रा में बैण्डबाजों की मधुर स्वरलहरी तथा आयोलाल झूलेलाल के गगन भेदी जयकारों से वातावरण गूंज उठा। झांकियों के साथ-साथ सिंधी जनरल पंचायत के वरिष्ठ व वयोवृद्व कार्यकर्ता, पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी के सदस्य बहुसंख्या में चल रहे थे। शोभायात्रा होली गेट, छत्ता बाजार, स्वामी घाट, चौक बाजार, घीया मंडी, कोतावाली रोड़ से होती हुई यमुना किनारे बंगाली घाट पर यमुना में ज्योत विसर्जन के साथ सम्पन्न हुई। शोभायात्रा का स्थानस्थान पर नागरिकों, व्यापारियों तथा विभिन्न संस्थाओं द्वारा पुष्प वर्षा कर भावपूर्ण स्वागत किया गया तथा मीठा शर्बत व प्रसाद वितरण भी किया। चेटीचण्ड पर्व की विशेष रौनक होली गेट स्थित अप्सरा पैलेस में दिखी। सिंधी समुदाय ने अपने इष्टदेव के जन्मोत्सव पर अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर, सपरिवार भागीदारी की। अप्सरा पैलेस में सामुहिक सजातीय भण्डारा प्राप्तकर आयोलाल-झूलेलाल की मस्ती में हर कोई डूब गया। इससे पूर्व सिंधी पंडित मोहनलाल महाराज ने झूलेलाल की अमर ज्योत प्रज्जवलित की, तदोपरांत सिंधी लोकगीत और झूलेलाल के तराने प्रस्तुत किये गए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नन्हें मुन्ने बच्चों ने सरस्वती वंदना, स्वागत गीत, राधाकृष्ण संग होली, राम आए हैं, नवरात्रि पर गरबा, शिव विवाह आदि अद्भुत नृत्य नाटिकायें प्रस्तुत की। स्वयं को राष्ट्रीय धारा के साथ जोड़ते हुए सिंधी समुदाय के नन्हें मुन्ने बच्चों ने अपनी संस्कृति और सभ्यता एवं सिंधी बोली का अद्भुत प्रदर्शन कर सबका मन मोह लिया। इसमें बच्चों ने नाटक का मंचन कर भगवान झूलेलाल का जीवन चित्र प्रस्तुत किया। नृत्य नाटिका द्वारा बच्चों सिंधी भाषा – बोली को बढ़ावा दिया। इस मौके पर नवजात बच्चों को सामुहिक रूप से लोरी दी गई।