ग़ाज़ियाबाद

पुलिस अब भय नहीं,भरोसे का नाम है जनता के प्रहरी की नई परिभाषा

वेलकम इंडिया

गाजियाबाद। पुलिस कमिश्नरेट ने पुलिस आयुक्त जे. रविन्द्र गौड़ के नेतृत्व में मई 2025 से जून 2025 के मध्य कानून व्यवस्था, पारदर्शी पुलिसिंग और अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश की है। जन शिकायतों पर संवेदनशीलता, पारदर्शी रिपोर्टिंग, सख्त अपराध नियंत्रण और जवाबदेही से पुलिस की छवि में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है। पुलिस द्वारा जनसामान्य को दी जा रही सेवाओं को सुगम और भरोसेमंद बनाने के प्रयास अब परिणाम देने लगे हैं। इसका प्रमाण है 25,000 से अधिक प्रकरणों पर ली गई जन प्रतिक्रिया, जिसमें पुलिस के खिलाफ शिकायतें नाममात्र ही पाई गईं। 1 मई से 15 जून 2025 के बीच कुल 12094 प्राथमिक सत्यापन कार्यवाही पूरी की गई, जिनमें से 3691 आवेदनों पर फीडबैक प्राप्त हुआ और मात्र 3 में ही पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई। भर्ती और चरित्र सत्यापन से संबंधित सैकड़ों मामलों में एक भी शिकायत सामने नहीं आई। किरायेदार सत्यापन, घरेलू सहायकों और कर्मचारियों के सत्यापन जैसे कुल 3488 मामलों में भी पुलिस का आचरण पूर्णत: संतोषजनक रहा। एफआईआर की प्रतियां घर पहुंचाकर देने के क्रम में 1437 मामलों में बीट अधिकारी खुद पीड़ितों के घर पहुंचे और केवल एक ही पुलिसकर्मी के खिलाफ शिकायत मिली। न्यायालय के आदेशों के पालन में 461 शिकायतकतार्ओं से प्रतिक्रिया ली गई, जिनमें से केवल एक में असंतोष प्रकट किया गया। पुलिस कमिश्नरेट द्वारा अपराध नियंत्रण के मोर्चे पर भी उल्लेखनीय कार्य किया गया। अप्रैल से जून 2025 के बीच पुलिस ने 70 अभियुक्तों को विभिन्न संगीन मामलों में गिरफ्तार किया। पुलिस मुठभेड़ों में 50 अपराधियों का सामना हुआ, जिनमें से 62 को मौके पर गिरफ्तार किया गया। थाना कविनगर और टीला मोड़ क्षेत्र में हुई लूट की घटनाओं में शामिल नौ अपराधियों को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर 16.55 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति और वाहन बरामद किए गए। 18 जून को थाना मुरादनगर में हुई हत्या के मामले में दोनों आरोपियों को मुठभेड़ में घायल कर पकड़ा गया, जिनके पास से पिस्टल भी जब्त की गई। सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि अपराधियों पर निरोधात्मक कार्यवाही में भी पुलिस ने सख्त रुख अपनाया। गुंडा एक्ट के अंतर्गत 89 कार्यवाहियां की गईं, 90 अपराधियों पर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया, 1135 अपराधियों की जमानत के बाद निगरानी रखी गई, और 1000 से अधिक अपराधियों के डोजियर तैयार किए गए। 31 कुख्यात अपराधियों को जिला बदर कर कमिश्नरेट सीमा से बाहर भेजा गया और उनकी सूचना सार्वजनिक की गई। अपराधियों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर उनके ठिकानों को ध्वस्त करने की प्रक्रिया भी तेज की गई है। शातिर अपराधियों के नेटवर्क को तोडेÞ के लिए 10 वर्ष से अधिक समय से सक्रिय अपराधियों का विस्तृत डेटा तैयार किया गया है।

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