
नई दिल्ली। एक साल के भीतर नक्सलमुक्त भारत का लक्ष्य पूरा होता दिखने लगा है। केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह नक्सलवाद से अति प्रभावित जिलों की संख्या 12 से घटाकर मात्र छह रह गई है। अमित शाह ने इसे एक नया मील का पत्थर बताया है। उन्होंने साफ किया कि सरकार 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने के प्रति कटिबद्ध है। गृह मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पहले नक्सलवाद से प्रभावित कुल जिलों की संख्या 38 थी, जिनमें अति प्रभावित जिले 12 थे, जो अब आधी रह गई है। इसके साथ ही नक्सलवाद से अपेक्षाकृत कम प्रभावित जिलों (डिस्ट्रिक्ट आॅफ कंसर्न) की संख्या भी नौ से घटकर छह और कम प्रभावित जिले (अदर एलडब्ल्यूई इफेक्टेड डिस्ट्रिक्ट) की संख्या भी 17 से घटकर छह रह गई है। नक्सलवाद से अति प्रभावित छह जिलों में छत्तीसगढ़ के चार जिले बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा, झारखंड का एक जिला पश्चिमी सिंहभूम और महाराष्ट्र का एक जिला गढ़चिरौली है। वहीं, कम प्रभावित छह जिलों में आंध्र प्रदेश का अल्लूरी सीताराम राजू, मध्य प्रदेश का बालाघाट, ओडिशा के तीन जिले कालाहांडी, कंधमाल व मलकानगिरी और तेलंगाना का भद्राद्रि-कोठागुडेम जिला है। इसी तरह से बेहद कम प्रभावित जिलों में छत्तीसगढ़ के तीन जिले दंतेवाड़ा, गरियाबंद व मोहला- मानपुर-अंबागढ़ चौकी, झारखंड का लातेहार, ओडिशा का नुआपाड़ा और तेलंगाना का मुलुगु शामिल हैं। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार नक्सलवाद के प्रति कठोर नीति और उनसे प्रभावित इलाकों के सर्वांगीण विकास के लिए अथक प्रयास कर रही है।