वो आपातकाल नहीं कांग्रेस का ‘अन्यायकाल’ था- अमित शाह

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आपातकाल के खिलाफ जारी संघर्ष ने ही लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखा है। मोदी जी ने ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाने का निर्णय इसलिए लिया, ताकि देश की चिर स्मृति में यह बना रहे कि जब कोई सरकार तानाशाह बनती है, तो देश को कैसे भयानक दुष्परिणाम भुगतने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि आपातकाल लगाया जानेवाला दिन, 25 जून सभी को याद दिलाता है कि कांग्रेस सत्ता के लिए कितनी दूर जा सकती है। वह आपातकाल नहीं बल्कि कांग्रेस का ‘अन्यायकाल’ था। केंद्रीय गृह मंत्री ने मंगलवार को एक कार्यक्रम में कहा कि भले ही 1975 के आपातकाल को 50 वर्ष हो गए हों, लेकिन कांग्रेस के ”अत्याचार, तानाशाही और अन्याय” की यादें आज भी लोगों के मन में ताजा हैं। द्रमुक, समाजवादी नेताओं और अन्य पर निशाना साधा, जो कांग्रेस के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये लोग उस पार्टी के साथ बैठे हैं जिसने आपातकाल लगाकर ”लोकतंत्र की हत्या” की थी। आपातकाल के बाद देशभर में विपक्षी नेता, छात्र कार्यकर्ता, पत्रकार और संपादकों समेत 1.1 लाख लोग गिरफ्तार किए गए थे। इसके बाद गुजरात और तमिलनाडु में गैरकांग्रेस सरकारों को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बर्खास्त कर दिया था। उन्होंने कहा, ”दुर्भाग्यवश, आपातकाल का सामना करने वाले कई लोग अब कांग्रेस पार्टी के साथ हैं। मैं इन पार्टियों द्रमुक, समाजवादी (समाजवादियों) और अन्य से पूछना चाहता हूं, कि जब आप उस पार्टी के साथ हैं जिसने देश में लोकतंत्र की हत्या की, तो आपको लोकतंत्र के बारे में सवाल पूछने का क्या अधिकार है?”शाह ने कहा कि भारत तानाशाही को स्वीकार नहीं कर सकता क्योंकि यह देश लोकतंत्र का जन्मस्थान है। तानाशाह के चारों ओर एक छोटे से समूह को छोड़कर किसी को भी आपातकाल पसंद नहीं आया। यही कारण है कि जब आपातकाल हटा, तो भारत के लोगों ने देश की पहली गैर-कांग्रेस सरकार का चुनाव किया।” गृह मंत्री ने कहा कि जब आपातकाल लगाया गया, तब वह 11 वर्ष के थे और उनके गांव से 184 लोग गिरफ्तार कर साबरमती जेल में डाले गए थे।



