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अंतरिक्ष से ऐसी विजयी मुस्कान के साथ लौटीं भारतवंशी सुनीता

नई दिल्ली। सुनीता विलियम्स, निक हेग, बुच विल्मोर और रोस्कोस्मोस μलोरिडा के तल्हासी में स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान से पृथ्वी पर वापस लौटे। इसी बीच उत्साहित और खुशी के साथ सुनीता विलियम्स ने वहां उपस्थित लोगों का अभिवादन अपना हाथ हिलाकर किया। भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स 286 दिनों के बाद धरती पर वापस लौट आई हैं। अंतरिक्ष एजेंसी- नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक सुनीता और बैरी विल्मोर को लेकर लौट रहा यान तड़के 3.27 बजे अमेरिका के μलोरिडा में समुद्र तल पर उतारा। अलेक्जेंडर गोरबुनोव μलोरिडा के तल्हासी में स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान से पृथ्वी पर वापस लौटे। यान का सफल स्प्लैशडाउन होने के बाद, बारी- बारी से निक हेग, बुच विल्मोर, सुनीता विलियम्स और रोस्कोस्मोस के अंतरिक्ष यात्री खुशी-खुशी हाथ हिलाते और मुस्कुराते हुए वापस आए। पृथ्वी पर आने के साथ ही सुनीता विलियम्स ने अपना हाथ दिखाकर वहां उपस्थित लोगों का अभिवादन किया। सुनीता विलियम्स ने आईएसएस पर इस बार अपना सबसे लंबे समय तक रहने का रिकॉर्ड बनाया। एक बार में 286 दिन तक अंतरिक्ष में रहकर सुनीता नासा की रिकॉर्ड बुक में भी अपना नाम दर्ज करा चुकी हैं। दरअसल, अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों की बात करें तो एक दौरे में सबसे ज्यादा दिन तक आईएसएस पर रहने का रिकॉर्ड अब तक फ्रैंक रूबियो के पास है। वहीं, मार्क वांडे हेई अब तक 355 दिन आईएसएस पर बिताए हैं। इसके बाद स्कॉट केली, महिला अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टिना कॉश और पेगी व्हिट्सन का नंबर है। इस लिहाज से एक दौरे में आईएसएस पर सबसे ज्यादा दिन बिताने वाले अंतरिक्ष यात्रियों में सुनीता विलियम्स छठे नंबर पर काबिज हो गई हैं। हालांकि, इसके लिए उन्होंने इस बार अंतरिक्ष यात्री एंड्रयू मॉर्गन का 272 दिन का रिकॉर्ड तोड़ दिया। नासा के स्पेसएक्स क्रू-9 मिशन के अंतरिक्ष यात्री निक हेग, बुच विल्मोर, सुनीता विलियम्स और रोस्कोस्मोस के अंतरिक्ष यात्री अलेक्जेंडर गोरबुनोव μलोरिडा के तल्हासी में स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान से पृथ्वी पर वापस लौटे। यान का सफल स्प्लैशडाउन होने के बाद, ये अंतरिक्ष यात्री खुशी-खुशी हाथ हिलाते और मुस्कुराते हुए वापस आए। बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स 9 महीने तक अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर फंसे रहे थे, जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण मिशनों में भाग लिया और वैज्ञानिक कार्य किए। उनका यह मिशन लंबा और चुनौतीपूर्ण था, लेकिन वे अब सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौट आए हैं।

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