सीएम योगी ने किया देश के पहले ग्रीन डेटा सेंटर का शिलान्यास

वेलकम इंडिया
गाजियाबाद। गाजियाबाद एक बार फिर देश की तकनीकी और औद्योगिक क्रांति का गवाह बना, जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारत सरकार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को साहिबाबाद में सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सीईएल) और ईएसडीएस की साझेदारी से विकसित होने वाले ग्रीनफील्ड डेटा सेंटर का शिलान्यास किया। यह डेटा सेंटर न केवल डिजिटल इंडिया को ऊर्जा देगा, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2070 तक देश को नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए सीईएल की प्रगति और पुनरुत्थान को आत्मनिर्भर भारत का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि एक समय था जब इस संस्था पर संकट के बादल मंडरा रहे थे और इसे निजीकरण की सूची में डाल दिया गया था, लेकिन आज यह लाभ में चल रही मिनी रत्न कंपनी के रूप में केंद्र सरकार को लाभांश का चेक सौंप रही है। उन्होंने कहा कि यह संस्था अब ‘अमृत कालज् में प्रवेश कर चुकी है और प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभा रही है। सीएम योगी ने इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की तेजी से बदलती छवि का उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य की अर्थव्यवस्था बीते वर्षों में ढाई गुना बढ़ी है और छह करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठे हैं। आज निवेशक उत्तर प्रदेश को भारत का सबसे उभरता हुआ औद्योगिक और तकनीकी केंद्र मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2027 तक राज्य में 20,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें सीईएल की केंद्रीय भूमिका होगी। शिलान्यास समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और ग्रीन डेटा सेंटर की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी ली। उन्होंने एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया। इस अवसर पर सीईएल की ओर से भारत सरकार को 21 करोड़ रुपये का लाभांश चेक भेंट किया गया। साथ ही मल्टी इंफ्रा के साथ 200 मेगावाट सोलर मॉड्यूल के निर्माण को लेकर एक महत्वपूर्ण एमओयू भी हस्तांतरित किया गया। मुख्यमंत्री ने सीईएल द्वारा रक्षा, रेलवे, अक्षय ऊर्जा और शिक्षा के क्षेत्रों में किए जा रहे नवाचारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्थान भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता का मजबूत स्तंभ बन चुका है। उन्होंने कहा कि देश का पहला सोलर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल सीईएल ने तैयार किया था और अब यह देश का पहला ग्रीनफील्ड डेटा सेंटर भी विकसित कर रहा है। डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस और आकाश जैसी मिसाइलों के निर्माण में सीईएल जैसे संस्थानों की तकनीकी सहायता महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने आॅपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की ये मिसाइलें अब पाकिस्तान में ‘टेस्टेडज् और पूरी दुनिया में ‘ट्रस्टेडज् हैं।



