रिफाइनरी के 800 मजदूरों ने किया निराहार सत्याग्रह

वेलकम इंडिया
मथुरा। इंडियन आॅयल मथुरा रिफाइनरी के 800 से अधिक संविदा श्रमिकों ने शनिवार के दिन निराहार रहकर कार्य किया और प्रबंधन द्वारा उनकी मांगें पूरी न करने पर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। विगत 9 जून को प्रस्तुत मांग-पत्र के द्वारा पेट्रोलियम वर्कर्स यूनियन की कांट्रेक्ट वर्कर्स मथुरा रिफाइनरी यूनिट ने संविदा श्रमिकों के बीच पारिश्रमिक और सुविधाओं के असंवैधानिक अंतर को समाप्त करने हेतु बर्ष 2017 से देय यातायात भत्ता एरियर सहित दिये जाने और जनवरी 2025 से देय ग्रेच्युटी और लीव एनकेशमेंट का सभी ट्रेड्स में भुगतान कराने के लिए अवैध रुप से पारिश्रमिक की वापसी पर रोक लगाने और निकाले गये श्रमिकों की कार्य बहाली की मांग की है। यूनियन ने श्रमिकों की समस्याओं के निराकरण के लिए रिफाइनरी स्तर पर तंत्र विकसित करने की मांग भी रखी है। भूख हड़ताल में सुबह 8 बजे से रिफाइनरी प्लांट, रिफाइनरी नगर, रिफाइनरी अस्पताल और स्वर्ण जयंती अस्पताल के संविदा श्रमिकों ने उत्साह के साथ निराहार श्रम सत्याग्रह में भाग लिया एवं मजदूर विरोधी रिफाइनरी प्रबंधन को कुंभकर्णीय नींद से जगाने का प्रयास किया है। यूनियन के अध्यक्ष मधुवन दत्त चतुवेर्दी एडवोकेट ने श्रमिकों के इस निराहार श्रम सत्याग्रह को विलक्षण गांधीवादी प्रयोग बताया है। साथ ही कहा है कि तानाशाह रिफाइनरी प्रमुख मुकुल अग्रवाल के रवैए से रिफाइनरी मजदूर पिछले काफी समय से परेशान चल रहे हैं। जिनकी ओर रिफाइनरी प्रमुख मुकुल अग्रवाल द्वारा कोई ध्यान नही दिया गया है। साथ ही उम्मीद जताई है कि आईओसीएल मुख्यालय व रिफाइनरी प्रबंधन श्रमिकों की न्यायपूर्ण मांगों का शीघ्र समाधान करे, अन्यथा रिफाइनरी मजदूर जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। यूनियन के मथुरा रिफाइनरी नगर इकाई के अध्यक्ष दिलीप दुबे ने कहा कि यूनियन पदाधिकारियों ने सांसद, राज्य सभा सांसद, आदि जनप्रतिनिधियों को पत्र भेजकर रिफाइनरी के संविदा श्रमिकों की समस्याओं के निराकरण में सहयोग की अपील भी की है। सत्याग्रह को समर्थन और सहयोग के लिए मथुरा के सभ्य समाज, लेखकों, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, रंग कर्मियों और सामाजिक, राजनैतिक कार्यकतार्ओं का यूनियन ने आभार व्यक्त किया है।



