50 साल पेंशन से वंचित रहीं 112 वर्षीय अम्मा

-हर गांव -गली में पेंशन बंधवाने, बंद होने की समस्या की शिकार हैं चाची, ताई
-50 सिर पेंशन से अम्मा को वंचित रखने के लिए कौन है जिम्मेदार
मथुरा। बाकलपुर इंद्रपुरी की 112 वर्षीय अम्मा रम्मूली देवी का सोमवार को वृद्धावस्था पेंशन के लिए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचना और डीएम द्वारा तीन दिन में पेंशन बंधवाना चर्चा का विषय बन गया है लेकिन यह घटना लचर तंत्र को सुधारने का एक बड़ा सवाल छोड़ गयी है। ज़िन्दगी के अन्तिम पायदान पर पहुंच कर अम्मा की पेंशन जरूर बंध जाएंगी लेकिन 50 साल पेंशन से वंचित रखने के लिए जिम्मेदार लोगों का क्या होगा? अभी हर इलाके में सैकड़ों उम्र दराज चाची, ताई, अम्मा पेंशन बंधवाने, बंधने के बाद बंद हो जाने जैसी समस्या के चलते आए दिन परेशान घूमती हैं।
गरीब के लिए वृद्धावस्था एवं विधवा पेंशन जैसी सरकारी योजनाएं गरीबों के जीवन निर्वहन में बहुत बड़ा सहारा बनती हैं लेकिन इस काम को भी हर गांव में दलाल ही अंजाम दिला पाते हैं। विभागीय अफसरों और दफ्तरों तक लोगों की पहुंच नहीं है। आमजन विशेषकर महिलाओं के लिए तो यह सब बेहद दिक्कत जदा है। जन सेवा केन्द्रों की बात करें तो वहां भी हर काम के 10-15 रुपए नियत शुल्क के बजाय मनमाना शुल्क वसूला जाता है। बात उनकी भी ठीक है । फ़ार्म भरना, पीडीएफ डोक्युमेंट डाउनलोड करना आदि कयी काम होते हैं जिन्हें निर्धारित सरकारी शुल्क में कर पाना संभव नहीं। काम कराना है तो दाम कितने ख़र्च होंगे यह बात दिमाग से निकालनी पड़ेगी।
उल्लेखनीय है कि 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने वाले बुजुर्ग की वृद्धावस्था पेंशन बंधती है। इधर अम्मा रम्मूली के जीवन के 52 बरस बगैर पेंशन के ही गुजर गये। पेंशन में मिलने वाली धनराशि अम्मा के जीवन को और सुखद बना सकती थीं लेकिन काबिल तंत्र ने उन्हें उनके हक से 5 दशक तक महरूम रखा। अब यह भी संभव नहीं कि दोषी तंत्र को चिन्हित कर उनके द्वारा किए गये अपराध का दंड मिल सके।



