देश का किसान और केंद्रीय बजट 2026— शेखर त्यागी, तलहैटा

मोदीनगर,( अनिल वशिष्ठ)। शेखर त्यागी तलहैटा ने कहा कि आज भारत सरकार द्वारा केंद्रीय बजट 2026 प्रस्तुत किया गया। बजट में आर्थिक विकास, अवसंरचना विस्तार तथा विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति के लिए अनेक घोषणाएँ की गई हैं। तथापि, देश का वह महत्वपूर्ण वर्ग जो राष्ट्र की खाद्य सुरक्षा की आधारशिला है — कृषक वर्ग, उसकी अपेक्षाओं की पूर्ति इस बजट में पर्याप्त रूप से होती हुई प्रतीत नहीं होती।
यह सर्वविदित है कि देश की लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से कृषि एवं उससे संबद्ध गतिविधियों पर निर्भर है। इसके बावजूद बजट प्रावधानों में कृषि क्षेत्र के लिए कोई ऐसा ठोस, दूरगामी एवं निर्णायक कदम दृष्टिगोचर नहीं होता, जिससे किसानों की आय, आर्थिक सुरक्षा एवं भविष्य को स्थायित्व मिल सके। बजट के प्रमुख बिंदुओं के संदर्भ में निम्न तथ्य विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं—
• प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को यथावत रखा गया है, किंतु सहायता राशि में कोई वृद्धि नहीं की गई है।
• कृषि उत्पादन की लागत निरंतर बढ़ रही है, जबकि किसानों की आय में उसके अनुरूप वृद्धि सुनिश्चित नहीं हो पाई है।
• किसानों की आय वृद्धि एवं प्राकृतिक तथा बाजार जोखिमों के प्रभाव को कम करने हेतु स्पष्ट और दीर्घकालिक नीति का अभाव परिलक्षित होता है।
• न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) एवं कृषि उत्पादों की बाज़ार सुरक्षा के विषय में कोई ठोस और स्पष्ट दिशा प्रस्तुत नहीं की गई है।
कृषक वर्ग केवल अल्पकालिक सहायता नहीं, बल्कि स्थिर एवं विश्वसनीय कृषि नीति, सम्मानजनक आय के साधन तथा भविष्य की आर्थिक सुरक्षा की अपेक्षा करता है। यह आवश्यक है कि नीति निर्माण की प्रक्रिया में ज़मीनी स्तर पर कार्यरत किसानों की वास्तविक परिस्थितियों, चुनौतियों एवं आवश्यकताओं को समुचित रूप से सम्मिलित किया जाए। आशा की जाती है कि सरकार आगामी समय में कृषि क्षेत्र के महत्व को दृष्टिगत रखते हुए किसानों के हित में आवश्यक नीतिगत सुधार एवं ठोस निर्णय लेगी। क्योंकि एक सशक्त किसान ही सशक्त राष्ट्र की नींव रखता है।



