ग़ाज़ियाबाद

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के गठन के साथ चार चरणों में राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा-जनपद स्तर पर संयुक्त मंच गठन के निर्देश, समन्वय से मजबूत होगी रणनीति

गाजियाबाद। प्रदेश के शिक्षकों के हितों और शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध को लेकर शिक्षकों ने अब राष्ट्रव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। गुरुवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के गठन पर विस्तृत चर्चा करते हुए आंदोलन की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया। महासंघ के गठन के पश्चात टीईटी अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर चरणबद्ध कार्यक्रम घोषित किए गए हैं। महासंघ ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन को सफल और प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश के सभी जनपदों में घटक संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त जनपदीय मंच का गठन अति आवश्यक है। इस संबंध में प्रदेश नेतृत्व से अपेक्षा की गई है कि वह अपने स्तर से निर्देश पत्र जारी कर सभी जनपदों में महासंघ के घटक संगठनों से संपर्क स्थापित कर शीघ्र संयुक्त मंच का गठन सुनिश्चित कराए। उद्देश्य है कि शिक्षक-शिक्षिकाएं एक मंच पर संगठित होकर अपने अधिकारों की लड़ाई को मजबूती प्रदान कर सकें। महासंघ के निर्णयानुसार प्रत्येक जनपद में बैठक कर संयुक्त मंच तैयार किया जाएगा, जिसमें एक अध्यक्ष संयोजक तथा एक मंत्री सहसंयोजक की जिम्मेदारी निभाएंगे। साथ ही जो भी संगठन इस मुहिम से जुडऩा चाहता है, उसे सम्मानपूर्वक उचित स्थान देने की बात कही गई है। जनपद स्तर पर गठन के उपरांत महासंघ के बैनर तले व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए आगामी कार्यक्रमों की कार्ययोजना पहले से तैयार की जाएगी। घोषित कार्यक्रम के प्रथम चरण में 9 मार्च से 15 मार्च तक महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा केंद्र व राज्य के नेता प्रतिपक्ष को टीईटी अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर ईमेल, डाक पत्र और संदेश भेजे जाएंगे।
द्वितीय चरण में 13 अप्रैल 2026 को प्रत्येक जनपद मुख्यालय पर शिक्षक एकत्रित होकर मुख्य मार्गों पर मोटरसाइकिल रैली और पैदल मार्च करेंगे तथा सायंकाल मशाल जुलूस निकालकर विरोध दर्ज कराएंगे। तृतीय चरण में 8 मई 2026, रविवार को प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित इको गार्डन पार्क में विशाल धरना-प्रदर्शन और रैली आयोजित की जाएगी, जिसके पश्चात विधानसभा तक मार्च किया जाएगा। महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि इसके बाद भी सरकार ने शिक्षक-शिक्षिकाओं की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो चतुर्थ चरण में देशभर के शिक्षक नई दिल्ली स्थित संसद भवन तक मार्च और घेराव करेंगे। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ में उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ, अटेवा, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संगठन, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, टीएससीटी, उत्तर प्रदेशीय माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ, बीटीसी शिक्षक संघ, यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा), बेसिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन, महिला शिक्षक मोर्चा, शिक्षा मित्र संघ सहित अनेक प्रमुख संगठन शामिल हैं। इसी क्रम में समस्त घटक संगठनों के पदाधिकारियों से आग्रह किया गया है कि आगामी आंदोलन की विस्तृत कार्ययोजना पर विचार-विमर्श हेतु 7 मार्च 2026 को दोपहर 3 बजे बीआरसी मुरादनगर में आयोजित बैठक में अनिवार्य रूप से प्रतिभाग कर अपने महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत करें। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह आंदोलन केवल टीईटी अनिवार्यता के विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षक सम्मान, सेवा सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था में स्थायित्व की व्यापक लड़ाई का हिस्सा है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा स्वरूप ले सकता है।

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