ग़ाज़ियाबाद

अखिल भारतीय राष्ट्रीय मांग दिवस पर गाजियाबाद में रेल कर्मचारियों का जोरदार प्रदर्शन

गाजियाबाद।
ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (AIRF) के आह्वान पर 2 फरवरी 2026 को अखिल भारतीय राष्ट्रीय मांग दिवस के अवसर पर गाजियाबाद मैन ब्रांच कार्यालय में जोरदार प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन NRMU गाजियाबाद को-ऑर्डिनेशन कमेटी की तीनों शाखाओं द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कामरेड अजय कुमार सक्सेना ने की। आंदोलन का नेतृत्व कामरेड लोकेंद्र सिंह ने किया। इस अवसर पर दिल्ली से पधारे कामरेड शिव गोपाल मिश्रा (महामंत्री, AIRF), एस.के. त्यागी (केंद्रीय अध्यक्ष, NRMU), कामरेड अनूप शर्मा (मंडल मंत्री, दिल्ली मंडल) एवं सहायक महामंत्री मोहम्मद रफीक ने कर्मचारियों को संबोधित कर आंदोलन को मजबूती प्रदान की। पूरे कार्यक्रम का संचालन अनुशासन और जोश के साथ संपन्न हुआ।
राष्ट्रीय मांग दिवस पर सैकड़ों की संख्या में रेल कर्मचारी उपस्थित रहे। कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी लंबित एवं जायज़ मांगों को लेकर केंद्र सरकार और रेल प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। एकता, अनुशासन और संगठनात्मक शक्ति का यह प्रदर्शन रेल कर्मचारियों की मजबूती का स्पष्ट संदेश था।
लंबित मांगों पर तुरंत कार्रवाई की मांग
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि वर्षों से लंबित मांगों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रमुख मांगों में—
कैडर रिस्ट्रक्चरिंग रिपोर्ट शीघ्र जारी की जाए
सभी सेफ्टी कैटेगरी को रिस्क अलाउंस दिया जाए
पेट्रोलमेन की बिट 12 किमी से अधिक न हो
आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों की जल्द घोषणा हो
अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि ट्रैफिक व रनिंग कर्मचारियों के KMA व ALK में 25% वृद्धि 01.01.2024 से लागू की जाए और बकाया का तत्काल भुगतान हो। साथ ही ग्रेड-2 व ग्रेड-1 का मर्जर, महिलाओं को CCL पर दोनों वर्षों में पूर्ण वेतन, माता-पिता दोनों को मेडिकल व पास सुविधा, UPS में संशोधन कर OPS के शेष लाभ, ड्यूटी ऑवर 8 घंटे से अधिक न हों, PLB की सीलिंग ₹7000 से बढ़ाई जाए, तथा रनिंग स्टाफ को MACP का लाभ दिए जाने की मांग उठाई गई।
कुल मिलाकर 36 सूत्रीय मांगों को जल्द पूरा करने की पुरजोर अपील की गई।
एकजुट रेल कर्मचारी—सबसे बड़ी ताकत
यह आयोजन इस बात का सशक्त प्रमाण बना कि संगठित, जागरूक और एकजुट रेल कर्मचारी ही संघर्ष की सबसे बड़ी ताकत हैं। कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी ने राष्ट्रीय मांग दिवस को एक सार्थक, अनुशासित और सफल आंदोलन के रूप में स्थापित किया।

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