शहर-राज्य

स्मार्ट सिटी का दावा और जमीनी हकीकत: शर्मा नगर का सेमी अंडरग्राउंड कूड़ेदान बना गंदगी का अड्डा

मेरठ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के दावे लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। शहर के पॉश इलाकों में गिने जाने वाले शर्मा नगर में स्थित सेमी अंडरग्राउंड कूड़ेदान की हालत किसी स्लम क्षेत्र से भी बदतर हो चुकी है।

तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कूड़ेदान पूरी तरह भर चुका है और कूड़ा बाहर सड़कों पर बिखरा पड़ा है। प्लास्टिक, खाने का कचरा, कागज, डिस्पोजल प्लेटें और गंदगी के ढेर से न केवल दुर्गंध फैल रही है, बल्कि बीमारी फैलने का खतरा भी मंडरा रहा है। आसपास लगे बैठने के लिए बनाए गए बेंच भी कूड़े से घिरे हुए हैं, जिससे आम नागरिकों का वहां बैठना तक मुश्किल हो गया है।

12 लाख की लागत, फिर भी बदहाल व्यवस्था

गौरतलब है कि जागृति फाउंडेशन द्वारा करीब 12 लाख रुपए की लागत से पूरे मेरठ शहर में 17 सेमी अंडरग्राउंड कूड़ेदान लगाए गए थे। शुरुआती दौर में इन कूड़ेदानों का संचालन और सफाई व्यवस्था ठीक-ठाक रही, लेकिन बाद में नगर निगम मेरठ की लापरवाही के चलते यह महत्वाकांक्षी योजना दम तोड़ती नजर आ रही है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि अब इन कूड़ेदानों से नियमित कूड़ा उठान नहीं हो रहा, जिसके कारण कूड़ा बाहर फैल रहा है और क्षेत्र में गंदगी बढ़ती जा रही है। यह स्थिति साफ तौर पर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।

शौचालय बने, पर सफाई नदारद

स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर में कई सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण भी कराया गया, लेकिन उनकी सफाई व्यवस्था भी भगवान भरोसे है। लोगों का कहना है कि शौचालयों में नियमित सफाई नहीं होने से लोग उनका उपयोग करने से कतराने लगे हैं, जिससे खुले में गंदगी फैलने की समस्या और बढ़ रही है।

निगम की अनदेखी से बढ़ रहा जनआक्रोश

स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की यह बदहाली सरकार और प्रशासन के दावों को खोखला साबित कर रही है।

अब सवाल यह उठता है कि जब शहर के प्रमुख इलाकों में ही यह हाल है, तो बाकी मेरठ की स्थिति क्या होगी? अगर जल्द ही इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो स्मार्ट सिटी का सपना केवल फाइलों और पोस्टरों तक ही सिमट कर रह जाएगा।

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